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नए ब्रेकिंग सिस्टम के भरोसे सरपट दौड़ेगी रेलगाड़ी

नए ब्रेकिंग सिस्टम के भरोसे सरपट दौड़ेगी रेलगाड़ी

रेलगाड़ियों की गति बढ़ाने और सुरक्षा के लिहाज से रेलवे ट्रेनों में नया ब्रेकिंग सिस्टम (इलेक्ट्रो न्यूमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम) लगाने की तैयारी कर रहा है। सप्ताह के अंत तक एक राजधानी रेलगाड़ी में इस नए ब्रेकिंग सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर खड़ी 22 डिब्बों की इस गाड़ी के हर डिब्बे में लगभग 250 मिट्टी के बोरे लादे गए हैं ताकि नए ब्रेकिंग सिस्टम की क्षमताओं का आकलन यात्रियों से भरी गाड़ी के तौर पर किया जा सके। यह परीक्षण सप्ताह के अंत तक वेस्ट सेंट्रल रेलवे में किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार राजस्थान के कोटा शहर के करीब यह परीक्षण किया जाएगा।

पारंपरिक और इलेक्ट्रो न्यूमैटिक ब्रेक में अंतर
रेलगाड़ियों में फिलहाल एयर ब्रेकिंग सिस्टम लगा हुआ है। यह पूर्ण रूप से हवा के दबाव पर काम करता है। गाड़ी का ड्राइवर जब ब्रेक लगाता है तो ब्रेक के अंदर तेज हवा का दबाव बनता है और ब्रेक पहियों पर चिपक जाता है। वहीं, इलेक्ट्रो न्यूमेटिक ब्रेकिंग सिस्टम बिजली पर काम करता है। दुनिया के ज्यादातर विकसित देशों में इसी ब्रेकिंग सिस्टम का प्रयोग किया जाता है। इसमें इंजन से सभी डिब्बों के ब्रेक जुड़े होते हैं। इन पर थ्री वायर कंट्रोल सर्किट के जरिए नियंत्रण किया जाता है। इस ब्रेक पर सात चरणों में नियंत्रण किया जा सकता है।

आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड डेवलपमेंट आग्रनाइजेशन) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ये नया ब्रकिंग सिस्टम रेलवे में एक क्रांति के तौर पर होगा। तकनीकी जरूरतों के पूरा होते ही इसका परीक्षण किया जाएगा।

क्या हैं फायदे : इलेक्ट्रो न्यूमेटिक ब्रेकिंग सिस्टम एयर ब्रेकिंग सिस्टम से काफी बेहतर है। जहां एयर ब्रेकिंग सिस्टम में ब्रेक लगाने पर गाडम्ी 800 से 1000 मीटर की दूरी पर रुकती है, वहीं इस ब्रेकिंग सिस्टम में गाड़ी ब्रेक लगने के बाद 30 से 40 प्रतिशत तक कम दूरी तय करती है। एयर ब्रेक एक-एक कर डिब्बों में लगते हैं, जबकि इलेक्ट्रो न्यूमेटिक ब्रेक सभी डिब्बों में एक साथ लगता है। बेहतर ब्रकिंग के चलते ड्राइवर आत्मविश्वास के साथ गाड़ी चलाता है। उसे पता होता है कि वह ब्रेक लगाएगा को गाड़ी कुछ ही दूरी पर रुक जाएगी। 

शताब्दी की रफ्तार160 किलोमीटर होगी
03 जुलाई को 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से नई दिल्ली से आगरा के बीच 12 डिब्बों की एक शताब्दी गाड़ी का ट्रायल किया जाएगा। यह गाड़ी में परीक्षण के दौरान सिर्फ गाड़ी को चलाने का काम कर रहे रेल कर्मी मौजूद होंगे। जिन रेलवे क्रासिंगों पर रेल कर्मी मौजूद नहीं होते हैं उन पर भी इस परीक्षण के दौरान गेट मैन को लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

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