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इंसेफलाइटिस पीड़ित बच्चों का नहीं किया इलाज, होंगे निलंबित

गया। वरीय संवाददाता। इंसेफलाइटिस पीड़ित बच्चों का इलाज नहीं करना चार डाक्टरों को महंगा पड़ सकता है। उनके निलंबन की प्रक्रिया शुरु हो गई है। मंगलवार को गया डीएम संजय कुमार अग्रवाल ने डाक्टरों के निलंबन का प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचवि को भेजा है।

जिले में इंसेफलाइटिस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 25 डाक्टरों की प्रतिनियुक्ति की गई थी। इनमें चार डाक्टरों ने लापरवाही बरती। वे गया नहीं पहुंचे। गया पहुंचने का आदेश मिलने के बाद भी अरवल के चिकित्सा पदाधिकारी डा. भास्कर और रोहतास के डा. अशोक कुमार गुप्ता ने गया में योगदान नहीं किया था।

जहानाबाद के डा. इम्तेयाज अहमद ने योगदान दिया लेकिन उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाने से इंकार दिया। वहीं रोहतास के डा. रामकृष्ण सिंह सक्षम पदाधिकारी से आदेश लिए बगैर छुट्टी पर चले गए थे। मंगलवार को डाक्टरों के विरूद्ध कार्रवाई की अनुशंसा करने के बाद जिलाधिकारी ने कहा कि एईएस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्राम) और जेई (जापानी इंसेफलाइटिस) को लेकर सबों को अलर्ट रहने की जरुरत है। ऐसे में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जिले के सभी अस्पतालों को अलर्ट रहने और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध कराए गए एम्बुलेंस का सदुपयोग करने का भी निर्देश है।

ट्रेनिंग के लिए दिल्ली जाएंगे डाक्टरएईएस और जेई पर नियंत्रण के लिए दो चिकित्सा पदाधिकारी डा. एम.ई. हक और डा. त्रिभुवन प्रसाद को ट्रेनिंग के लिए दिल्ली भेजा जाएगा। ट्रेनिंग के बाद एईएस और जेई से प्रभावित मरीजों के बेहतर इलाज और रोकधाम के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे। जिलाधिकारी ने इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाने का भी निर्देश दिया। रोजाना करें आकलनजिलाधिकारी ने गया के सिविल सर्जन और मगध मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक को स्थिति का रोजाना आकलन करने का निर्देश दिया है।

उन्हें रोजाना इसकी रिपोर्ट डीएम को देनी होगी। जिले के सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को भी अपने-अपने क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करना है। गया में जापानी इंसेफलाइटिस से अबतक कुल आठ बच्चों की मौत हो चुकी है।

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