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पिपरमिंट की खेती से युवाओं को दिखाई तरक्की की राह

मधुबन। श्याममनोहर सिंह। क्षेत्र के युवा किसान परंपरागत फसलों की खेती से हटकर मेंथाआयल पिपरमिंट की खेती से अपनी किस्मत बदल रहे हैं। तहसील क्षेत्र के मैनपरवा गांव निवासी युवा किसान अशोक सिंह चार वर्ष से पिपरमिंट की खेती कर रहे हैं। इस खेती से कम समय व कम लागत से होने वाले लाभ देख दूसरे किसान भी अब इसके प्रति नजरिया बदल रहे हैं।

यही कारण है कि किसान न सिर्फ वैज्ञानिक पद्धति अपना रहे हैं, बल्कि व्यवसायिक दृष्टिकोण से लाभ-नुकसान का आकलन कर इसकी खेती पर जोर देने लगे हैं। क्षेत्र के मोलनापुर, मित्तूपुर, खरा देवार, हाता, सुग्गीचौरी, कामना, बिनटोलिया, बखरिया में मेंथाआयल की खेती से होने वाले लाभ से किसान इस ओर रुख कर रहे हैं। अभी इक्का-दुक्का किसानों ने अशोक सिंह की पहल पर इसकी शुरुआत की है। इस खेती के लिए किसानों में उत्साह दिख रहा है। अशोक सिंह का कहना है कि प्रति बीघे की भूमि में ढाई हजार की लागत से 40 से 45 लीटर मेंथाआयल वाष्पन विधि से निकालते हैं।

इसकी कीमत 45 से 50 हजार के आस-पास होती है। गेहूं की फसल कटने के बाद मेंथाआयल की तैयार नर्सरी को उसी खेत में जुताई के बाद पानी भरकर धान की तरह रोपाई विधि से की जाती है। महज तीन माह में सफल तैयार हो जाने के बाद विशेष किस्म की टंकी से वाष्पन विधि से तेल निकालते हैं। आगे बताया कि लगभग सभी फसलों की खेती कर चुके हैं, इसमे सबसे बेहतर पिपरामिंट की खेती लगी। इसका लाभ पहले देखने के लिए महज एक बीघा खेत में दो वर्ष पूर्व पौधे रोपे थे।

इसका लाभ देखकर अब दो एकड़ भूमि में इसकी खेती कर रहे हैं।

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