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रोशनी में नहाया ताजमहल तो हो जाएगा खराब

आगरा, मनोज मिश्र। ताजमहल पर लाइटिंग करने के प्रयासों को धक्का लगा है। लाइटिंग करने से यमुना नदी में मौजूद बैक्टीरिया के सक्रिय होने से ताजमहल के पत्थरों को खतरा हो सकता है। इससे उसकी खूबसूरती पर दाग लग सकते हैं। यह मानना है वर्ल्ड मॉन्यूमेंट फंड की भारत में तैनात प्रतिनिधि का। मई में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में ताजमहल को और ज्यादा निखारने के लिए उस पर लाइटिंग करने की बात उठी थी।

इसी को लेकर जून में आगरा के मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर की अध्यक्षता में सर्किट हाउस में हुई बैठक में पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों ने ताजमहल पर लाइटिंग करने पर मुहर लगाई थी। इसके लिए तय किया गया था कि पहले कुछ अन्य स्मारकों पर लाइटिंग करके देख ली जाए कि कहीं उससे पत्थरों पर असर तो नहीं पड़ रहा। कुछ दिनों पहले मैसूर लैंप्स की टीम ने आगरा किला और एत्मादुद्दौला स्मारक पर लाइटिंग डालकर इसका प्रयोग भी किया था।

इधर, यमुना रिवर फ्रंट गार्डन को निखारने के लिए दो दिन से वर्ल्ड मॉन्यूमेंट फंड की टीम आगरा आई हुई है। इस टीम की भारत में तैनात प्रतिनिधि अमिता बेग ने कहा कि ताजमहल पर लाइटिंग नहीं होनी चाहिए। इससे स्मारक के पत्थरों को खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि ताज पर रोशनी डालने से यमुना नदी में मौजूद बैक्टीरिया सक्रिय हो जाएंगे और वे स्मारक के पत्थरों पर चिपककर उसकी शोभा को खराब कर देंगे। इससे आने वाले समय में पत्थरों को काफी नुकसान हो सकता है।

ताजमहल पर नए प्रयोग करने से नुकसान हो सकता है। रोशनी की ओर नदी का बैक्टीरिया आकिर्षत होगा। अच्छा तो यही रहेगा कि ताज को दिन की रोशनी में ही देखा जाए। अमिता बेग, इंडिया रिप्रेंजेंटेटिव वर्ल्ड मॉन्यूमेंट फंडअभी विभाग को प्रस्ताव नहीं मिला है। मैसूर लैंप्स ने दो स्मारकों पर रोशनी कर डेमो दिया था। प्रस्ताव आने के बाद उसे डीजी एएसआई को भेज दिया जाएगा। इस बारे में भी इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकते। एनके पाठक, अधीक्षण पुरातत्वविद।

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