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अफसरों से वसूले जाएंगे 355 करोड़ रुपये

ग्रेटर नोएडा/पंकज पाराशर। यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के गांवों में हुए भूमि घोटाले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी अफसरों से 355 करोड़ रुपये वसूलने का आदेश दिया है। शासन की ओर से गठित जांच समिति ने एक रिपोर्ट दी, जिसमें बताया कि जगनपुर अफजलपुर गांव में करीब 355 करोड़ रुपये की जमीन अधिकारियों ने भूमाफिया को दे दी।

न्यायालय ने सरकार से अब तक कोई कार्रवाई नहीं करने का कारण भी पूछा है। अगस्त 2011 में जगनपुर, अफजलपुर, अट्टा फतेहपुर और दनकौर में हुआ भूमि घोटाला ‘हिन्दुस्तान’ ने उजागर किया था। इसके बाद जिला स्तर पर जांच शुरू हुई। तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट विजयपाल सिंह ने जिलाधिकारी को रिपोर्ट दी, जिसमें बताया गया कि बड़े स्तर पर घोटाला किया गया है। लिहाजा वृहद जांच किसी विशेषज्ञ से कराई जाए। इस पर 12 जनवरी, 2012 को चकबंदी आयुक्त ने पांच सदस्यीय एक जांच दल का गठन किया।

इस जांच दल ने 13 फरवरी, 2012 को अपनी रिपोर्ट चकबंदी आयुक्त को सौंपी। जिसमें लिखा गया है कि जगनपुर अफजलपुर गांव में 2,96,510 वर्ग मीटर सरकारी भूमि गलत ढंग से भूमाफिया को दी गई है। इससे सरकार को 3,55,81,20,000 रुपये की क्षति पहुंचाई गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर चकबंदी आयुक्त ने 08 जून, 2012 को 22 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश जिलाधिकारी को दिया। क्राइम ब्रांच इस मामले की जांच कर रही है।

वहीं इस प्रकरण में ढीली कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए ‘बोधिसत्व समाज सेवा संस्थान’ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी। याची के अधविक्ता पंकज कुमार सिंह ने बताया कि जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस सुनीत कुमार की खंडपीठ ने प्रमुख सचवि (राजस्व) से पूछा है कि जब यह आकलन किया जा चुका है कि अधिकारियों ने 355 करोड़ रुपये से ज्यादा क्षति सरकार को पहुंचाई है तो उनसे रिकवरी क्यों नहीं की गई। जो एफआईआर एक साल पहले दर्ज करवाई गई थी, उसमें क्या कार्रवाई की गई है।

न्यायालय ने शासन को आदेश दिया है कि आरोपियों से इस धनराशि की वसूली की जाए। उन लोगों पर भी कार्रवाई की जाए, जिन्हें आरोपी अधिकारियों ने गलत ढंग से फायदा पहुंचाया है। सरकारी जमीन को वापस लेने के लिए सिविल, क्रिमिनल या राजस्व संबंधी जो भी मुकदमे चल रहे हैं, उनमें कार्रवाई तेज की जाए। हाईकोर्ट ने प्रदेश के चकबंदी आयुक्त, गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को तलब किया है। तीनों अधिकारियों को 16 जुलाई को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है।

अभी दो और गांवों के मामलों की जांच होनी बाकीशासन के आदेश पर गठित जांच समिति ने अभी केवल जगनपुर, अफजलपुर गांवों में हुई चकबंदी की जांच की है। अट्टा फतेहपुर और दनकौर के मामलों की जांच होगी बाकी है। जगनपुर अफजलपुर में 355 करोड़ रुपये से ज्यादा घोटाला सामने आया है। पूरी जांच होने पर यह आंकड़ा एक हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। वर्जन-अभी मैं केवल इतना ही कह सकता हूं कि तीन अधिकारियों को मुख्यालय से निलंबित किया गया है।

बाकी आठ को जिलों में निलंबित किया गया है। शासन इस प्रकरण पर बेहद गंभीर है। अदालत के आदेश का पालन किया जा रहा है। जांच चल रही है, इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है। सुरेश सिंह यादव, अपर आयुक्त (चकबंदी), उत्तर प्रदेश।

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