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मुख्य न्यायाधीश सरकार से नाराज

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम को जज बनाने की सिफारिश वापस किए जाने से नाराज चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा ने मंगलवार को केंद्र को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सरकार न्यायपालिका की स्वायत्तता में दखल न दे। जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि बिना उनकी जानकारी के केंद्र ने सुब्रह्मण्यम के नाम को स्वीकृत तीन नामों से अलग कर दिया जो उचित नहीं है।

नाराज लोढ़ा बोले, सरकार की आपत्तियों के बावजूद सुब्रह्मण्यम को सुप्रीम कोर्ट में जजशिप देने के लिए चयन मंडल (कोलेजियम) तैयार था। उनकी फाइल फिर से सरकार के पास भेजने का फैसला ले लिया गया था लेकिन गोपाल ने जज बनने से ही मना कर दिया, जिससे वह बेहद निराश हुए हैं।

जस्टिस बीएस चौहान की सेवानिवृत्ति के कार्यक्रम में लोढ़ा ने कहा कि 28 जून को विदेश दौरे से लौटने के बाद उन्होंने सुब्रह्मण्यम को अपने आवास पर बुलाया और उम्मीदवारी वापस लेने संबंधी पत्र वापस लेने को कहा। सीजेआई बोले, एक बार तो गोपाल ने फाइल आगे बढ़ाने को कह दिया। मगर थोड़ी देर बाद कुछ सोचकर बोले कि वह फिर मिलने आएंगे। लेकिन वह नहीं आए और छह लाइन का पत्र भेज दिया जिसमें कहा गया कि वह सुप्रीम कोर्ट का जज नहीं बनना चाहते। ऐसी स्थिति में कोलेजियम ने पाया कि फाइल को फिर सरकार के पास भेजने का कोई अर्थ नहीं है।

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