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फिसल गई यशवंत सिन्हा की जुबान

फिसल गई यशवंत सिन्हा की जुबान

मंगलवार को झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा काफी आक्रामक मुद्रा में थे। बजट पर बोलते-बोलते एक जगह उनकी जुबान फिसल गई और उन्होंने सार्वजनिक तौर पर असंसदीय भाषा का इस्तेमाल कर डाला।

झारखंड के मुख्यमंत्री पद की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा : मीडिया के लोग माइक लगा कर बार-बार यही पूछते हैं कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। कोई भी .... सीएम बन जाये, क्या फर्क पड़ेगा। यशवंत ने अपनी बात पर बाद में अफसोस तक नहीं जताया। मालूम हो कि इससे पहले भी हजारीबाग में यशवंत ने कहा था कि मुख्यमंत्री का पद उनके लिए बहुत छोटा है।

मेयर से खफा हुए सिन्हा
कार्यक्रम में मेयर आशा लकड़ा तय समय से लगभग 45 मिनट विलंब से पहुंचीं। उनके आने की उम्मीद में आधा घंटा तक कार्यक्रम शुरू नहीं किया गया था। नाराज होते हुए यशवंत सिन्हा ने चैंबर अध्यक्ष विकास सिंह से कहा कि कार्यक्रम शुरू कीजिये। मेयर आएंगी, तो इंतजार करेंगी। किसी को अधिकार नहीं है कि उसके चलते इतने लोग इंतजार करें। उसके बाद कार्यक्रम की शुरुआत कर दी गई। जब मेयर पहुंचीं, तो उन्होंने सिन्हा का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

मौका मिलेगा तो भाग जायेंगे उद्यमी
यशवंत सिन्हा ने कहा कि यहां कई उद्यमी हैं, जिन्हें मौका मिलेगा तो यहां से भाग जायेंगे। यहां रहकर अपनी हत्या कोई क्यों करवाना चाहेगा। जो फंस गये, उनकी तो मजबूरी है। विधि-व्यवस्था को लेकर राज्य की काफी बदनामी है। जब यह ठीक नहीं कर सकते, तो हमें कुछ भी मांगने का अधिकार नहीं है। उग्रवाद नियंत्रण के लिए जो पैसा आता है, उसे डीसी साहब लोग गार्डन बनाने पर खर्च करने की बजाय जगह पर खर्च करें।

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