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अमेरिका ने एनएसए से करवाई भाजपा की जासूसी

अमेरिका ने एनएसए से करवाई भाजपा की जासूसी

अमेरिका ने अपनी शीर्ष खुफिया एजेंसी एनएसए से 2010 में भाजपा एवं दुनिया के पांच अन्य राजनीतिक दलों की जासूसी करवाई थी, इन दलों में मिस्र की मुस्लिम ब्रदरहुड और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी भी शामिल है। यह जानकारी एक गोपनीय दस्तावेज से मिली है।

सूची में भाजपा के अलावा अन्य विदेशी राजनीतिक दलों में लेबनान की अमल, बोलिवेरियन कंटिनेंटल कोऑर्डिनेटर ऑफ वेनेजुएला, मिस्र की मुस्लिम ब्रदरहुड, इजिप्शियन नेशनल साल्वेशन फ्रंट और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) ने इन पर नजर रखने के लिए अनुमति मांगी थी।

द वॉशिंगटन पोस्ट ने सोमवार को इस संबंध में दस्तावेज को सार्वजनिक किया था। इस दस्तावेज में 193 विदेशी सरकारों के साथ विदेशी गुटों और अन्य निकायों के नाम शामिल हैं जो विदेशी खुफिया निगरानी अदालत की ओर से मंजूर 2010 के प्रमाणन का हिस्सा थे। इस सूची में भारत शामिल है।

समाचार पत्र ने बताया कि इन संगठनों पर एनएसए विदेशी खुफिया सूचना एकत्र करने के मकसद से नजर रख सकती है। एनएसए के पूर्व कांट्रैक्टर एडवर्ड स्नोडेन से मिले दस्तावेज का हवाला देते हुए पत्र ने यह बात कही। समाचार पत्र ने कहा कि प्रत्येक वर्ष अदालत से इस तरह से नजर रखने के संबंध में एक नये प्रमाणन के लिए एफआईएसए संशोधन अधिनियम की धारा 702 के तहत मंजूरी प्राप्त करनी होती है।

द वॉशिंगटन पोस्ट की खबर के अनुसार, चार देशों को छोड़कर कोई भी विदेशी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के दायरे से बाहर नहीं है। ये चार देश ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड हैं। नजर रखने के संबंध में प्रमाणन में विश्व बैंक, आईएमएफ, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं।

समाचार पत्र के अनुसार, जरूरी नहीं है कि एनएसए प्रमाणन में चिन्हित सभी देशों या संगठनों को निशाना बनाता हो, उसे ऐसा करने के लिए केवल अधिकृत किया गया है। भारत और विशेष तौर पर भाजपा पर नजर रखने के बारे में एक सवाल के जवाब में एनएसए की प्रवक्ता वेनी वाइन्स ने कहा कि राष्ट्रपति, नेशनल इंटेलीजेंस के निदेशक और राष्ट्रीय खुफिया प्राथमिकता ढांचे के तहत विभागों एवं एजेंसियों की ओर से तय विशिष्ठ खुफिया जरूरतों के आधार पर एजेंसी विदेशी खुफिया सूचना एकत्र करता है।

गौरतलब है कि स्नोडेन ने मीडिया में हजारों गोपनीय दस्तावेज लीक किये थे, जिसमें कई एनएसए की ओर से संचालित थे। वाइन्स ने कहा कि एफआईएसए संशोधन अधिनियम की धारा 702 चुनिंदा खुफिया सूचना एकत्र करने को मंजूरी देता है।

उन्होंने कहा कि धारा 702 के तहत विदेशी खुफिया निगरानी अदालत सालाना तौर पर राष्ट्रीय खुफिया एवं अटॉर्नी जनरल के विषय आधारित प्रमाणन की समीक्षा करता है और ऐसे गैर अमेरिकी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए अमेरिकी सरकार को प्रक्रिया चलाने की अनुमति देता है जो देश से बाहर स्थित हो..अगर ऐसे लक्ष्य से प्रमाणन के संबंध में विदेशी खुफिया सूचना मिलने की संभावना हो।

वाइन्स ने कहा कि जनवरी 2014 में अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने राष्ट्रपति नीति निर्देश 28 जारी किया था, जिसमें अमेरिकी खुफिया गतिविधियों के बारे में अतिरिक्त नीतिगत दिशा प्रदान की गई थी। उन्होंने कहा कि संक्षेप में अमेरिकी निर्देशित खुफिया गतिविधियों के लिए एक विशिष्ठ खुफिया जरूरत, नीतिगत मंजूरी और कानूनी रूप से मंजूरी की जरूरत होती है जो धारा 702 के अनुरूप भी हो।

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