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आदर्श घोटाला: सीबीआई ने दूसरा पूरक आरोपपत्र दाखिल किया

आदर्श घोटाला: सीबीआई ने दूसरा पूरक आरोपपत्र दाखिल किया

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने करोड़ों रुपये के आदर्श सोसाइटी घोटाला मामले में जांच का कार्य पूरा कर लिया है और उसने पिछले महीने विशेष सीबीआई अदालत में दूसरा पूरक आरोप पत्र दाखिल किया।
   
एजेंसी ऐसे फ्लैट मालिकों के बारे में विशेष नोट (एससीएन) तैयार कर रही है जो सोसाइटी में फ्लैट खरीदने के अयोग्य पाये गए और इसे जल्द ही महाराष्ट्र सरकार को सौंपा जायेगा। सीबीआई के एक अधिकारी ने आज कहा कि आरोपपत्र चार आरोपियों के खिलाफ दायर किये गए हैं जिसमें एक सदस्य और चार वित्त पोषक शामिल हैं।
   
अधिकारी ने कहा कि सोसाइटी के एक सदस्य की मौत हो गई है, इसलिए उसका नाम आरोपपत्र में शामिल नहीं किया गया है।

पिछले महीने पेश आरोपपत्र में पूर्व विधायक मुकुंदराव मानकर, लैंडस्केप रियल्टर प्राइवेट लिमिटेड (एलआरपीएल) के संजय कोंदवार और गोपाल कोंदवार और ब्रिटेन स्थित एनआरआई शरद मदन शामिल हैं। लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के एक अधिकारी के फ्लैट का वित्तपोषण कथित तौर पर मदन ने किया था। चूंकी अब वह जीवित नहीं है, इसलिए एजेंसी ने आरोपपत्र में उसका नाम शामिल नहीं किया है।
   
अधिकारी ने कहा कि एलआरपीएल एक मुखौटा कंपनी थी, जिसका एकमात्र उद्देश्य आदर्श में कथित बेनामी फ्लैट का वित्तपोषण करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि, एलआरपीएल ने मानकर को 62 लाख रुपया ऋण दिया था। आरोपपत्र के अनुसार, एलआरपीएल को पांच-छह मुखौटा कंपनियों से पैसा मिला था।
   
दिलचस्प बात यह है कि एक मुखौटा कंपनी का पता एक शैक्षणिक संस्थान का है जिसकी अध्यक्षता राज्य के एक कैबिनेट मंत्री करते हैं। इस मुखौटा कंपनी ने कथित तौर पर एलआरपीएल को पैसा दिया था। सीबीआई ने कहा कि उसे किसी मंत्री के शामिल होने के संबंध में पता नहीं चला है।
   
बहरहाल, एजेंसी ऐसे 27 फ्लैट मालिकों के संबंध में विशेष नोट (एससीएन) तैयार कर रही है जो सोसाइटी में फ्लैट खरीदने के अयोग्य पाये गए। एससीएन राज्य के मुख्य सचिव को सौंपा जायेगा। सीबीआई के अधिकारी ने कहा कि भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागडे और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु समेत 27 सदस्यों की सूची तैयार की गई है।
   
उन्होंने कहा कि सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर एससीएन पेश होने के बाद राज्य सरकार आगे की कार्रवाई के बारे में निर्णय कर सकती है। सीबीआई अधिकारी ने कहा कि सरकार निर्णय कर सकती है कि सदस्यता रद्द की जाये या नहीं।

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