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विधायकों व पार्षदों का चिकित्सा भत्ता फंसा

गैरमान्यता प्राप्त अस्पतालों में अपना अथवा अपने परिानों का इलाज कराने के कारण दर्जन भर से अधिक विधायकों और विधान पार्षदों के चिकित्सा भत्ता का भुगतान फंस गया है। कई भूतपूर्व विधायक भी इसी कारण भुगतान नहीं होने से परशान हैं। संसदीय कार्य विभाग और स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक करने के बावजूद इस समस्या के समाधान का रास्ता नजर नहीं आ रहा है। नियम के अनुसार मान्यताप्राप्त अस्पतालों में इलाज कराने के बाद ही इसमें हुए खर्च का भुगतान हो सकता है। अब कई विधायक अथवा विधान पार्षद जानकारी के अभाव में ऐसे अस्पतालों में अपने अथवा अपने परिानों का इलाज करा लेते हैं जो विधानसभा की सूची में मान्यता प्राप्ता नहीं हैं और भत्ते के भुगतान के लिए आवेदन कर देते हैं। कई विधायकों ने तो अपनी पत्नी के पांव की हड्डी टूटने और आंखों के इलाज के लिए भी अपोलो अस्पताल की शरण ले ली और नतीजा यह हुआ कि संसदीय कार्य विभाग ने उनके भुगतान की फाइल लौटा दी।ड्ढr ड्ढr विभाग का कहना है कि अपोलो अस्पताल उनकी सूची में मान्यताप्राप्त नहीं है और इसके कारण इसमें हुए इलाज का भुगतान करने में संकट है। एक पूर्व विधायक ने पटना के एक सुप्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ के यहां इलाज कराया और भुगतान के लिए बिल विधानसभा सचिवालय में सौंपा। सचिवालय के अस्पतालों की सूची में इस विशेषज्ञ का नाम ही नहीं था और पूर्व विधायक की फाइल फंस गई। इसी तरह समाजवादी पार्टी के एक विधायक की फाइल विधानसभा सचिवालय में दौड़ रही है। उन्होंने इलाज कराने जाने के पहले विधानसभा सचिवालय को यह सूचना दे दी कि वे अपोलो जा रहे हैं और उनकी फाइल अटक गई है। विधानसभा सचिवालय सूत्रों का कहना था कि विधायक एस्कॉर्ट में जाते तो ठीक था लेकिन अस्पताल के गैरमान्यता प्राप्त होने पर मामला मुश्किल हो जाता है।

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