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बंदों ने रखा रोजा, किया इफ्तार

इलाहाबाद। हिन्दुस्तान संवाद। माहे रमजान का पहला रोजा सोमवार को पूरे जोश के साथ रखा गया। बंदों ने सोमवार की भोर में उठकर सहरी खाई और शाम को सूरज डूबने के फौरन बाद इफ्तार किया। मस्जिदें नमाजियों से भरीं तो घर-घर इबादत का माहौल रहा। शिद्दत की गर्मी और उमस के बावजूद रोजेदारों ने हिम्मत नहीं हारी और रोजा रखकर रोजमर्रा के काम भी किए।

शिद्दत की प्यास ने जिस्मानी कमजोरी का एहसास कराया तो रब की नेमतों पानी, हवा, खाना आदि की अहमियत भी समझ में आई। पहले रोजा रखने के लिए मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में भोर के तीन बजे लोग जाग उठे। घर-घर सहरी का इंतजाम हुआ और रोजा रखने वालों ने सहरी खाई। फिर रोजे की नियत की और इबादत में जुट गए। दिन में भूख प्यास बर्दाश्त किया और शाम को इफ्तार किया। तकरीबन साढ़े पन्द्रह घण्टे लम्बे वक्त का रोजा मुकम्मल होने पर बंदों ने रब का शुक्र अदा किया।

ज्यादातर लोगों ने घरों में रोजा खोला। मगर, दुकानदारों व सर्विस करने वालों ने रास्ते में इफ्तार का वक्त होने पर बाजार या मस्जिदों में रोजा खोला। शहर की सभी मस्जिदों में इफ्तार का इंतेजाम रहा। रात में नमाजे ऐशा के बाद तरावीह की नमाज पढ़ी गई। इफ्तार के सामानों की खरीदारीमुस्लिम बाहुल्य इलाकों में शाम को खासी चहल पहल रही। लोगों ने रोजा खोलने के लिए सामानों की खरीदारी की। दही, बड़ा, फुलौरी, फुलकी, जलेबी से लेकर तरह-तरह के सामान खरीदे गए।

सबसे ज्यादा खजूर बिका। खजूर से इफ्तार करना सुन्नत है सो सभी ने खजूर खरीदा। ऐशा का वक्त होते होते बाजार में सन्नाटा हो गया और लोग तरावीह पढ़ने के लिए मस्जिदों में चले गए।

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