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बिजली चोरी रोकने में पॉवर कारपोरेशन नाकाम

बागपत। हमारे संवाददाता। बिजली चोरी से जिले में सरकार को साल में 100 करोड़ से ज्यादा की चपत लगी है। लाइनलॉस चालीस फीसदी पार पाने को बेताब है, मगर चोरी करने वालों की खर नहीं। बीस टीमों का गठन हुआ जो बिजली चोरों को बेनकाब करेगी। जिले को प्रति माह 60 से 80 मीलियन यूनिट बिजली मिलती है। गत साल 860 मीलियन यूनिट बिजली मिली, लेकिन अधिकांश बिजली चोरी में चली गई।

पॉवर कारपोरेशन का ब्योरा खंगालने से पता चला कि बागपत में लाइन लॉस 40 फीसदी से कम नहीं है। पॉवर कारपोरेशन अधिकारी डंके की चोट पर कहते हैं कि जिले में 3.50 लाख घरों में 1.5 लाख घर में कनेक्शन हैं, लेकिन बिजली 2.50 लाख में इस्तेमाल होती है। यानी डेढ़ लाख घरों में बिजली चोरी है। बिजली चोरी से सरकार को जिले में प्रति माह करीब आठ से 10 करोड़ यानी साल में 100 करोड़ से ज्यादा की चपत लगती है।

दयनीय स्थिति है कि लाइनलॉस में कमी आने के बजाय हर साल बढोत्तरी हो रही है। पावर कारपोरेशन का रिकार्ड खंगालने से साफ हो गया कि लाइनलॉस में बड़ौत अव्वल है। बागपत व खेकड़ा में कम लाइनलॉस नहीं है। बढ़ती चोरी से बिजली का थ्रू रेट नहीं बढ़ रहा है। शहर में थ्रू रेट प्रति यूनिट 1.17 रुपये है। देहात में 1.05 रुपये से ज्यादा थ्रू रेट हाथ नहीं आ रहा है। बिजली चोरी पर ब्रेक लगे तो थ्रू रेट तीन चार रुपये प्रति यूनिट पहुंचे बिना नहीं रहेगा।

तब पावरपोरेशन का रेवन्यू बढ़ेगा। बेहतर बिजली मिलेगी। सिस्टम ओवरलोड नहीं होगा जिससे बिजलीघरों की मीशनों तथा ट्रांसफार्मर खराबी में गिरावट आएगी,लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आता। हालांकि अब दस जुलाई से बिजली चोरों को बेनकाब करने को अभियान चलाने को बीस टीम गठित हो चुकी हैं। बिजली चोरी पकड़े जाने पर जेल की हवा भी खानी पड़ेगी और जुर्माना भी चुकाना पड़ेगा।

लाइलनलॉस का ब्योरासन लाइनलॉस2011 34%2012 37%2013 40%यहां ज्यादा लाइनलॉसएरिया लाइनलॉसबड़ौत 45%बागपत 35%खेकड़ा 32%एक जुलाई से गांवों में कैम्प लगा कनेक्शन देंगे। दस जुलाई से छापामार अभियान चलेगा। बिजली की चोरी पर जुर्माना लगेगा तथा एफआइआर होगी। डीके गर्ग अधीक्षण अभियंता।

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