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तो क्या संविदा कर्मियों को मानदेय के पड़ेंगे लाले!

हरदोई हिन्दुस्तान संवाद। मनरेगा के संविदा कर्मियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। अपने मानदेय के लिए लंबे समय से संघर्ष करते आ रहे संविदा कर्मियों का विरोध का दायरा और बढ़ सकता है। कम से कम मनरेगा के लिए आवंटित वार्षिक बजट के संकेतों से तो यही तस्वीर बनती नजर आ रही है। महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना का क्या हश्र होगा, और क्या होगा उन श्रमिकों का जो इस योजना में काम पाते आ रहे हैं।

यह बड़ा सवाल मनरेगा वित्त के बजट आवंटन के बाद खड़ा हो सकता है। मनरेगा से जुड़े अधिकारी संकेतों में बता रहे हैं पिछले कई सालों के बाद इस वित्तीय वर्ष के लिए नाम मात्र का बजट आवंटन किया जाना है। कम बजट आवंटन से श्रमिकों की मजदूरी, संविदा कर्मियों का मानदेय, पलायन के साथ साथ ग्रामीण विकास व श्रमिकों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

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