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पेस-भूपति विवाद में फंसा ओलंपिक पदक

ओलंपिक पदक के लिए तरस रहे इस महाकाय देश की निगाहें दुनिया की नम्बर एक टेनिस जोड़ी रहे पेस-भूपति पर लगी है। पर हालात बता रहे हैं कि यह उम्मीद भी गई।लिएंडर पेस और महेश भूपति घोर मनमुटाव के बावजूद देश के नाम पर एकाुट हो जाते हैं्र। डेविस कप, एशियाई खेल और ओलंपिक जसे बड़े खेलों के दौरान ये दोनों आपसी विवाद भुला कर देश को सम्मान दिलाते हैं। पर आपसी रािंश की टीस है कि जाती ही नहीं। बीजिंग के लिए दोनों की तैयारी थी। ओलंपिक मशाल रिले में भी पेस और भूपति एक साथ थे। पर दस ग्रैंड स्लैम खिताब विजेता महेश भूपति ने अचानक कह दिया कि वह पेस की बजाए भारत के दूसर नम्बर के खिलाड़ी रोहन बोपन्ना के साथ बीजिंग में खेलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि दोहा की कडुवाहट के बाद वह पेस के साथ बात तक नहीं करते। दोनों मिलकर खेल भी नहीं रहे। ऐसे में ओलंपिक पदक कैसे जीत सकते हैं। उन्होंने टेनिस संघ को भेजे ईमेल में कहा है कि पेशेवर टेनिस में जीत के लिए जरूरी है कि खिलाड़ियों में तालमेल हो और वे मिलकर काफी अयास कर चुके हों। इस लिहाज से फ्रेंच ओपन में जोड़ीदार बोपन्ना के साथ मेरा बेहतर तालमेल हैं। पर भारतीय टेनिस संघ तो इस पर 28 फरवरी को निर्णय ले चुका है।ड्ढr संघ अभी भी यह अनुभव करता है कि 34-35 साल की उम्र के बावजूद ली हेश की जोड़ी देश के लिए ओलंपिक पदक ला सकती है। सो, महेश भूपति के बुधवार को भेजे ईमेल के जवाब में टेनिस संघ के महासचिव अनिल खन्ना ने साफ तौर से उनसे कहा है कि ओलंपिक में भेजने के लिए सर्वश्रेष्ठ टीम का चुनाव किया गया है। यह डेविस कप नहीं है। बोपन्ना को अभी उस स्तर तक पहुंचने में समय लगेगा। खन्ना ने महेश को सलाह दी है कि वह देश हित में आपसी विवाद को भूलकर ओलंपिक पदक पर ध्यान केंद्रित करं। अपने रुख पर अड़े महेश ने यदि खन्ना की सलाह नहीं मानी तो ओलंपिक पदक का सपना चूर हो सकता है। वो छाती टकराना, वो शेरों की तरह दहाड़ना और वो दुनिया में इंडियन एक्सप्रेस के रूप में पहचान। सब बीते युग की बातें हो गई हैं।ड्ढr दोनों ने देश को बहुत सम्मान दिलाया है। पर अब उनका आपसी विवाद इस कदर हावी है कि वे चाह कर भी देश के लिए सम्मान जुटाने की स्थितियां नहीं ला पा रहे हैं। वर्ष 1पेस भूपति का स्वर्ण काल था। इसी वर्ष भारत की स्टार जोड़ी ने टेनिस में अति सम्मानित माने जाने वाले चारों ग्रैंड स्लैम के फाइनल में जगह बनाई थी और इनमें से दो के खिताब भी जीते थे। पर यह सफलता वे पचा नहीं पाए और छिटपुट बातों पर उनका विवाद इतना बढ़ा कि उन्हें दुनिया के नम्बर एक बनने के बाद अपनी जोड़ी तोड़नी पड़ी। टेनिस संघ लगातार ग्लू लगाने का काम कर रहा है। पर बात नहीं बन रही। यों तो बढ़ती उम्र के हमार टेनिस सितारों से ओलंपिक पदक की उम्मीद कम ही है पर उनका खत्म नहीं हो रहा विवाद इसे और भी कम कर रहा है।ड्ढr महेश ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि पेस के साथ वे पदक जीत पाएंगे। हालांकि बोपन्ना के साथ भी कोई गारंटी नहीं है पर युवा खिलाड़ी के साथ संभावना अधिक हैं। पिछले तीन ओलंपिक में पदक के लिए प्रयास कर चुकी पेस और भूपति की जोड़ी के लिए बीजिंग अंतिम अवसर है।ड्ढr पिछली बार एथेंस में इस जोड़ी ने जबरदस्त संघर्ष किया था पर मैराथन मुकाबले में पदक इनके हाथ से फिसल गया था।ड्ढr

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