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नक्सलवाद की ट्रेनिंग ले रहे बच्चे

उग्रवादी संगठनों में बच्चों की उपयोगिता का आंध्र प्रदेश में सफल प्रयोग के बाद अब इसका प्रयोग बिहार में भी हो रहा है। पुलिस की गतिविधियों की जानकारी रखने, महत्वपूर्ण सूचनाएं एकत्र करने और जरूरत पड़ने पर गुरिल्ला हमला करने के उद्देश्य से 12 से 18 वर्ष की आयु तक वाले बच्चों को माओवादी अपने संगठन में शामिल कर उन्हें झारखंड के जंगलों में सघन प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस दस्ते में उन माओवादियों के बच्चों की भर्ती की जा रही है जो पुलिस मुठभेड़ में मार जा चुके हैं।ड्ढr ड्ढr इसके अलावा कैडरों की मर्जी से भी उनके चुस्त-दुरूस्त बच्चों को उग्रवाद और विध्वंस का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बच्चों के मूवमेंट और उनकी उम्र को देख पुलिस या खुफिया अधिकारी उसपर शक न करें इसी मंशा से माओवादी बच्चों की एक फौा तैयार कर रहे हैं। इस दस्ते को ‘चाइल्ड लिबरशन आर्मी ’ का नाम दिया जा रहा है। गौरतलब है कि आंध्रप्रदेश में कार्यरत पूर्ववर्ती पीपुल्स वार ग्रुप और वर्तमान का भाकपा माओवादी के नाम से जाना जाने वाले संगठन ने वषों पहले से यह प्रयोग शुरू कर रखा है। बताया जाता है कि आंध्र से आए बाल दस्तों की एक टोली बिहार और झारखंड के बाल माओवादियों को प्रशिक्षण देने का काम कर रही है। आंध्र से आधा दर्जन की संख्या में आए बाल लड़ाके इन्हें सूचना संग्रह से लेकर हमला और बचाव तक का गुर सिखा रहे हैं। अत्याधुनिक हथियार चलाने से लेकर विस्फोटकों के उपयोग का भी उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बताया जाता है कि इस दस्ते के लिए चुने जाने वाले बाल लड़ाकों के परिानों को एक अच्छी खासी पारिश्रमिक भी दी जा रही है।

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  • Web Title: नक्सलवाद की ट्रेनिंग ले रहे बच्चे