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राज्य में भेड़ियों को बचाने की कवायद

देश में दो ही वोल्फ सैंक्चुअरि (भेड़िया अभ्यारण्य) हैं। एक बंगलुरु और दूसरा पलामू के महुआडांड़ में। रांची से 240 किलोमीटर दूर महुआडांड़ वोल्फ सैंक्चुअरि विगत तीन दशक से उपेक्षित रहा है। पिछले दो साल में इस पर केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान गया। वन संरक्षक मनोज सिंह के प्रयास से वोल्फ सैंक्चुअरि को बचाने का प्रयास शुरू किया गया है। इस वर्ष राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है, जिसमें नौ लाख की राशि मांगी गयी है। इतनी ही राशि केंद्र सरकार भी देगी।ड्ढr वोल्फ सैंक्चुअरि के सीएफ (बफर जोन) मनोज सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 06-07 में केंद्र से 7.6लाख और 07-08 में 16 लाख रुपये की राशि मिली। इस राशि से सैंक्चुअरि एरिया में वाटर होल्स, फायर प्रोटेक्शन सहित अन्य काम कराये जा रहे हैं। 23 जून 1ो महुआडांड़ वोल्फ सैंक्चुअरि नोटिफाइड हुआ था।ड्ढr वर्ष 2007 में हुई पशु गणना में भेड़ियों की संख्या 52 दर्ज की गयी। जबकि झारखंड में (पशु गणना 2003) भेड़ियों की संख्या 874 दर्ज की गया थी। सीएफ ने बताया कि पर्यावरण संतुलन के लिए जंगली जानवरों की संख्या में वृद्धि आवश्यक है। भेड़ियों का संरक्षण आवश्यक है। भेड़ियों के नेचुरल हैबिटेट को बचाने और उसके विकास की कोशिश हो रही है।

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