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30 मई, 2020|2:18|IST

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सिगरेट के 3.5 रुपये से खुल सकते हैं 50 एम्स

सिगरेट के 3.5 रुपये से खुल सकते हैं 50 एम्स

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने न सिर्फ हर सिगरेट के दाम में 3.5 रुपये बढ़ाने की मांग की है बल्कि बीड़ी और सिगरेट इंडस्ट्री को मिल रही छूट को भी खत्म करने की मांग की है। उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखा है कि 2014-15 के बजट में वित्त मंत्रालय सिगरेट की नई कीमतें लागू करे। उनके अनुसार सिगरेट महंगी होने पर कम लोग इसका इस्तेमाल करेंगे।

11,616 करोड़ सिगरेट की बिक्री
भारत में पिछले कई सालों में सिगरेट की खपत बढ़ी है। केन्द्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार साल 2010-2011 में जहां 11,148 करोड़ सिगरेट की बिक्री हुई थी वहीं साल 2011-2012 में यह संख्या बढ़कर 11,614 करोड़ पहुंच गई। इतनी सिगरेट की खपत की वजह यह है कि देश में स्मोकिंग करने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। पिछले दस सालों में देश में स्मोकिंग करने वाले पुरुषों की संख्या 8.3 करोड़ से बढ़कर 10.5 करोड़ हो गई है।

4.2 फीसदी स्वास्थ्य पर जीडीपी का खर्च
भारत में कुल जीडीपी का सिर्फ 4.2 फीसदी हिस्सा ही स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च होता है। इसमें से सिर्फ 30 फीसदी ही सरकार खर्च करती है बाकी खर्च निजी क्षेत्र का होता है। जबकि अमेरिका कुल जीडीपी का 17 फीसदी स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च करता है। क्यूबा में इलाज का 95 फीसदी खर्च सरकार वहन करती है। क्यूबा में प्रति 10 हजार आबादी पर 67 डॉक्टर उपलब्ध हैं जबकि भारत में सिर्फ छह। सिगरेट से मिलने वाले राजस्व को स्वास्थ्य क्षेत्र में इस्तेमाल करने पर हेल्थकेयर की सुविधाओं में काफी बदलाव आ सकता है। 

1.5 करोड़ को गरीब बनाती सिगरेट
एक अनुमान के मुताबिक भारत में कुल 3.9 करोड़ लोग इलाज में खर्चे की वजह से गरीब हैं। सिगरेट के धुएं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव से हर साल डेढ़ करोड़ लोग गरीब हो जाते हैं। देश में प्रति व्यक्ति लगभग 7920 रुपये स्वास्थ्य पर खर्च होते हैं। इसमें से सिर्फ 2340 रुपये ही सरकार खर्च करती है। इस हिसाब से देखें तो सिगरेट के 41 हजार करोड़ के अतिरिक्त खर्चे से देश के लगभग 5.1 करोड़ लोगों का मुफ्त में इलाज कराया जा सकता है।

60 लाख मौत हर साल सिगरेट से
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार
दुनिया भर में सिगरेट जैसे तंबाकू उत्पादों के सेवन से हर साल 60 लाख लोगों की मौत होती है। साल 2020 तक यह आंकड़ा 80 लाख पहुंच जाएगा। भारत में 27.5 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। ‘इंटरनेशनल तंबाकू कंट्रोल प्रोजेक्ट’ की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में साल 2020 तक लगभग 15 लाख लोगों की हर साल तंबाकू सेवन से मौत होगी।

क्या हो सकता है इन रुपयों से
1.6 करोड़ को मुफ्त इलाज सरकार के मुताबिक

डॉ. हर्षवर्धन बताते हैं कि सिगरेट की कीमतों में प्रति सिगरेट 3.50 रुपये बढ़ने पर सरकार को 3800 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। वहीं 12वीं पंचवर्षीय योजना की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रति व्यक्ति 2340 रुपये खर्च करती है। सिगरेट के दाम बढ़ने से जो राजस्व प्राप्त होगा अगर उसका इस्तेमाल स्वास्थ्य क्षेत्र में किया जाए तो इस पैसे से लगभग 1.6 करोड़ लोगों का मुफ्त में इलाज किया जा सकता है।

2.5 लाख लोगों का लीवर ट्रांसप्लांट हो सकता है
सिगरेट पर होने वाले इस अतिरिक्त खर्च को अगर स्वास्थ्य क्षेत्र में इस्तेमाल किया जाए तो इतनी रकम से 2.05 लाख लोगों का महंगे प्राइवेट अस्पताल में लीवर ट्रांसप्लांट किया जा सकता है।

3.5 हेल्थकेयर बजट इसी से निकल जाएगा
हर सिगरेट पर अतिरिक्त 3.5 रुपये खर्च करने पड़ेंगे तो देश में धूम्रपान करने वालों से लगभग 41 हजार करोड़ रुपये इकट्ठा हो जाएगा। साल 2012 में ही 11,616 करोड़ सिगरेट की बिक्री हुई थी। यह रकम देश के स्वास्थ्य बजट से बहुत ज्यादा है। साल 2013 में देश का हेल्थकेयर बजट 30,702 करोड़ रुपये था।

ये भी हो सकता है हर सिगरेट के 3.5 रुपये से
04 करोड़ परिवार दस हजार की सैलरी एक माह के लिए पा सकते हैं।
10 लाख 25 हजार मरीजों की किडनी ट्रांसप्लांट हो सकती है।
8.2 लाख छात्र आईआईटी जैसे संस्थान से बीटेक कर सकते हैं।

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