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खाद्य संकट पर भारत का पलटवार

भारतीयों की भारी खुराक को खाद्य संकट के लिए जिम्मेदार ठहराने वाले अमेरिका को करारा जवाब देते हुए भारत ने गुरुवार को कहा कि संकट की वजह भारत नहीं, बल्कि विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की नीतियां हैं। भारत ने पश्चिमी देशों पर पलटवार करते हुए कहा कि विकसित देशों की ‘अत्यधिक व अस्थिर’ मांग ने दुनिया भर में खाद्य समस्या को गंभीर बनाया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिका और यूरोपीय संघ ने कहा था कि भारत व चीन में खाद्यान्न की बढ़ती खपत वर्तमान अंतरराष्ट्रीय खाद्य संकट के लिए जिम्मेदार है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजदूत निरुपम सेन ने यहां यूनाइटेड नेशन्स इकोनॉमिक व सोशल काउंसिल की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दो साल में तेल की खपत में एक प्रतिशत बढ़ोतरी हुई, जबकि तेल कीमतों में 0 प्रतिशत का क्षाफा हुआ। उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट की वजह से डॉलर का मूल्य घटा और खाद्य फसलों का इस्तेमाल जव ईंधन के लिए किया जाने लगा। सच तो यह है कि अंतरराष्ट्रीय खाद्य संकट की प्रमुख वजह ये सारी बाते हैं। सेन ने ब्रेटन वुड्स इंस्टीटय़ूशन (बीडब्ल्यूआई) की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि खाद्य फसलों को छोड॥कर नकदी फसलें उगाने की सलाह देना गलत था। उन्होंने बीडब्ल्यूआई की खाद्यान्न निर्यात पर रोक हटाने की सलाह को खारिा करते हुए कहा कि संस्थानों की इस तरह की सलाह ही खाद्य संकट की वजह है। सेन ने कहा, ‘वे अमीरों के लिए सब्सिडी को उचित बताते है और गरीबों के लिए इसे गलत बताते है। ऐसी नीतियां खाद्यान्न उत्पादन पर नकारात्मक असर डालती हैं।

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