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‘कोरम’ पूरा करने की जद्दोचाहद

नीतीश सरकार मेडिकल कॉलेजों को एमसीआई (भारतीय चिकित्सा परिषद) के मानकों के अनुरुप बनाने में युद्ध स्तर पर जुट गई है। दूसर अर्थो में मानकों का ‘कोरम’ पूरा करने के लिए सरकार के अधिकारी दिन-रात एक किये हुए हैं। इसी महीने सूबे के सभी छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों का एमसीआई निरीक्षण होना है। 27-28 मई को सूबे के सबसे प्रतिष्ठित पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) का एमसीआई निरीक्षण प्रस्तावित है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग इतनी हड़बड़ी में है कि वह अपने ही द्वारा बनाये नियमों को शिथिल करते हुए सिर्फ एमबीबीएस डिग्रीधारी डाक्टरों को मेडिकल कॉलेज में धड़ाधड़ पदस्थापित कर रहा है। इनमे कई डाक्टर कॉन्टट्र पर नियुक्त हैं जो सिर्फ एमसीआई के निरीक्षण के लिए ही पदस्थापित किये जा रहे हैं।ड्ढr ड्ढr निरीक्षण के कुछ महीने बाद के ये पद फिर से रिक्त हो जाएंगे। दो वर्ष पहले हुए निरीक्षण में सूबे के सभी मेडिकल कॉलेजों में 24 से 30 फीसदी डाक्टर शिक्षकों के पद रिक्त पाये थे जिसको पूरा करने के लिए एमसीआई ने कड़ी चेतावनी दी थी। अगले एक पखवार में पीएमसीएच के साथ ही दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल भागलपुर, श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल मुजफ्फरपुर एवं अनुग्रह नारायण मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल गया का भी एमसीआई निरीक्षण होना है।ड्ढr ड्ढr पिछली बार के निरीक्षण में एमसीआई ने पद के अनुरुप प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिसटेंट प्रोफेसर एवं ट्यूटर नहीं रहने पर नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी थी। एमसीआई ने स्पष्ट कहा था कि इसे शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो मान्यता पर फिर से विचार किया जा सकता है। बावजूद सरकार दो वर्षो तक निष्क्रिय रही और अब ट्यूटर के पद पर मात्र एमबीबीएस डिग्रीधारी डाक्टरों को अस्थायी रूप से कांट्रक्ट बेसिस पर पदस्थापित किया जा रहा है।ं

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