अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वैशाली में तेजी से नहीं घूम रहे साइकिल के पहिये

धरहरा उच्च विद्यालय की आकांक्षा और चकसिकन्दर विद्यालय की अष्टम कक्षा की प्रियंका साइकिल मिलने पर खुश है। घर से विद्यालय की दूरी अब कुछ ही मिनटों में तय हो जाती है। जिन्दगी व पढ़ाई में गति आई है। गार्जियन भी उन्हें स्कूल भेजना बोझ नहीं समझ रहे। ठीक इसके विपरीत रामदौली स्थित शिवसागर विद्या मंदिर की नवम कक्षा की वर्षा रानी साइकिल नहीं मिलने से नाराज चल रही हैं। उसने बैंक में खाता भी खोल लिया है। बावजूद इसके अभी तक साइकिल नहीं मिली।ड्ढr ड्ढr ये खट्टा-मीठा हाल है जिले में साइकिल योजना का। योजना की गति सुस्त है। राष्ट्रीय सम विकास योजना के तहत वर्ष 2006-07 में ही अनुसूचित जाति, जन जाति व अति पिछड़ा वर्ग की 4182 छात्राओं का चयन किया गया था लेकिन उनमें अबतक केवल 2238 को ही साइकिलें मिलीं। शेष छात्राओं के लिए एक कंपनी को साइकिलें आपूर्ति करने का आदेश दिया गया है। रामदौली स्कूल में एक साइकिल निर्माता कंपनी के कारीगर साइकिल कसने में लगे हैं।ड्ढr दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योजना के तहत जिले के 78 हाई स्कूलों में सभी छात्राओं को साइकिलें देने के लिए बैंकों में उनके खाते खोलने की प्रक्रिया तेज हुई है। कितनी लड़कियों के अबतक खाते खुले, विभिन्न विद्यालयों से अभी तक पूरी रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय को नहीं मिली है।ड्ढr ड्ढr जिला शिक्षा पदाधिकारी देवशील के अनुसार इस योजना के तहत 1 करोड़ 67 लाख की राशि प्राप्त हुई है। हालांकि इस राशि से केवल 82 फीसदी छात्राओं को ही साइकिलें मिल सकेंगी। प्रत्येक छात्रा के खाते में दो हाार रुपये जमा किए जा रहे हैं। अब वह खुद साइकिल खरीदेगी और अपने स्कूल प्रधान के पास वाउचर जमा करगी। शंभूपुर कोआरी उच्च विद्यालय में अबतक 70 छात्राओं के खाते खुले हैं पर अब तक 16-17 को हीं साइकिलें मिलीं हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: वैशाली में तेजी से नहीं घूम रहे साइकिल के पहिये