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औद्योगिक गतिविधियों ने किया दामोदर को विषाक्त

भी दामोदर की कल-कल बहती जलधारा में प्रकृति की अठखेलियां होती थीं। बड़े-बड़े मगरमच्छ और कछुए का यहां निवास स्थान था। लेकिन औद्यौगिक गतिविधियों ने दामोदर को विषाक्त कर दिया। उक्त बातें भाजपा विधायक सरयू राय ने होटल ग्रीन होरिान में जव विविधता दिवस पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए कहीं।ड्ढr उन्होंने कहा कि दामोदर का जलीय जीवन और वनस्पतीय जीवन समाप्त हो चुका है। विकास विकलांगता के वर्तमान दौर में दामोदर क्षेत्र का जनजीवन प्रदूषण की विभिषिका को झेल रहा है। कुछ संवेदनशील प्रयास की वजहों से दामोदर की चर्चा अब विश्व स्तर पर होने लगी है।ड्ढr सेमिनार को संबोधित करते हुए विकास आयुक्त डॉ अशोक कुमार सिंह ने कहा कि अब रात में गांव में भी सियार की आवाज सुनाई नहीं देती है। गौरैया घर में फुदकती दिखाई नहीं देती। गिद्ध गायब हो गये। बाघों को बचाने के लिए कई प्रोजेकट बने बेतला टाइगर प्राजेक्ट पर करोड़ों खर्च हुए, लेकिन हमलोग टाइगर को ही नहीं बचा पाये। हम अपनी विफलता को नहीं स्वीकार करते।ड्ढr सेमिनार को प्रो आरएन शरण, प्रो एबी प्रसाद, डॉ संजय सिंह ने संबोधित किया। धन्यवाद ज्ञापन युगांतर भारती की मधु ने किया।

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