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जोड़ी नंबर वन

ऐसे किस्से अक्सर सुनने में आते हैं कि दो अभिनेताओं में बिल्कुल नहीं बनती लेकिन किसी फिल्म में उन्होंने साथ-साथ शानदार अभिनय किया। जाहिर है यह उनकी अभिनय क्षमता और पेशेवर कौशल का इम्तिहान होता है। लिएंडर पेस और महेश भूपति के बीच जो कुछ पिछले कई साल से चल रहा है, वह भी खेल से ज्यादा फिल्मी नाटकीयता के करीब है। भूपति ने अगले ओलंपिक में पेस के साथ खेलने से इनकार किया है और पेस ने भूपति को इसे ‘मूर्खतापूर्ण’ और ‘बचकाना’ कहा है। पेस की एक बात सही है कि पेस-भूपति की जोड़ी से ओलंपिक में जितनी उम्मीद रखी जा सकती है, उतनी किसी भी और जोड़ी से नहीं रखी जा सकती। पेस का कहना है कि देश के लिए खेलना दो व्यक्ितयों के मतोद से ज्यादा बड़ी चीज है, लेकिन इस बात में भी भूपति की दुखती रग दब सकती है। पिछले ओलंपिक में भी इस बात पर विवाद हुआ था कि पेस ने भूपति पर अगंभीर होने का आरोप लगाया था और भूपति को बुरा-भला कहा था और भूपति ने कहा था कि पेस सोचते हैं कि वे ही अकेले राष्ट्रभक्त हैं, बाकी लोग नहीं हैं। साथ न खेलने की घोषणाएं करते हुए यह एक वक्त की विश्व नंबर 1 जोड़ी बार-बार अलग हुई और फिर तमाम लोगों के समझाने-बुझाने पर साथ खेलने को राजी हुई। अभी-अभी डेविस कप के पहले सारी भारतीय टीम ने ही पेस के नेतृत्व में खेलने से इनकार कर दिया है। यह सच है कि पेस जब भी देश के लिए खेलते हैं तब उनके खेल में नई जान आ जाती है, लेकिन यह भी सच है कि वे इस भावना से इतने ज्यादा उत्तेजित हो जाते हैं कि दूसरों की प्रतिबद्धता पर शक करने लगते हैं। भूपति ने बार बार पेस का साथ छोड़ने की घोषणाएं कीं और बीच-बीच में पेस ने भी ऐसी बातें कह डालीं जो भूपति को बुरी लग सकती हैं। दोनों एक दूसर को नापसंद करते हैं, लेकिन इसके बावजूद दोनों में जो तालमेल है वैसा कम ही जोड़ियों में होता है। मौजूदा विवाद का हल क्या होगा, यह तो देखना होगा लेकिन यह भी सच है कि दोनों व्यक्ितगत नापसंदगी और खेल में सहअस्तित्व के अजीबोगरीब धागों से बंधे हुए हैं।

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