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तटबंध न बना तो फिर होगी तबाही

ऐरा चीनी मिल और दर्जनों गाँव एक बार फिर शारदा के निशाने पर हैं। नदी साल दर साल मिल की ओर बढ़ रही है, पर सिंचाई विभाग और प्रशासन बेखबर है। सिंचाई विभाग पाँच साल बाद भी ऐरा तटबंध का निर्माण पूरा नहीं कर पाया है। तटबंध के बीच में कई ‘गैप’ हैं। इन्हीं गैप से बाढ़ व कटान की आशंका और बढ़ गई है। सिंचाई विभाग के अफसर कहते हैं कि कुछ भूमि अधिग्रहण की समस्या है। उधर, एडीएम एमपी आर्या का कहना है कि बाढ़ व कटान की त्रासदी रोकने के लिए प्रशासन गम्भीर है। डीएम ने सिंचाई विभाग को 15 जून तक काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।ड्ढr गाँजर इलाके में हर साल शारदा और घाघरा तबाही मचाती हैं। सैकड़ों गाँवों की फसलें, जमीन, मकान सब नदियों की भेंट चढ़ते हैं। इसी तबाही को रोकने के लिए पाँच साल पहले शारदा बैराज से ऐरा पुल तक तटबंध बनाने का निर्णय लिया गया। सिंचाई विभाग ने 28.800 किलोमीटर के तटबंध का निर्माण शुरू कराया। 2003 में सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने इसका उद्घाटन किया था। सिंचाई विभाग ने कई एजेंसियों के जरिए निर्माण शुरू कराया, लेकिन तटबंध के बीच कई ‘गैप’ फिर भी रह गए। तटबंध तो अधूरा रहा पर शारदा की विनाशलीला नहीं थमीं। इस बार तो और भी ‘खतरा’ है। गाँजर के विकास की धुरी गोविन्द शुगर मिल, ऐरा शारदा के निशाने पर है। पाँच साल पहले मिल से शारदा नदी की दूरी आठ किमी थी, अब यह दूरी महा ढाई किमी रह गई है। तटबंध के बीच के गैप से बाढ़ की आशंका सबसे ज्यादा है।ड्ढr दर्जनों गाँव भी निशाने पर हैं। प्रतापी बेहड़, गंगोलिया, पहाड़ीपुर, समरदा, दूल्हामऊ, कबीरपुर जसे दर्जनों गाँवों के लोगों की नींदें अभी से उड़ गई हैं। तटबंध निर्माण पूरा करने के लिए गोविन्द शुगर मिल्स ऐरा और विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने भी जिलाधिकारी और प्रमुख सचिव को पत्र भेजा है। एडीएम एमपी आर्या का कहना है कि इस मामले में सिंचाई विभाग को निर्देश दिए जा चुके हैं।

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