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राजरंग

हनी ब्रदर जाने देते, क्या बिगड़ जाताहनी ब्रदर ऐसा नहीं करते। अर बंगला तो वही है, सिर्फ चेहर बदल गये हैं। तीन साल से ज्यादा समय ही उस बंगले में अपने एएम साहब रहे थे। मेम साहब भी रहती थीं। वैसे मेम साहब तो अब भी रहती हैं। अब देखिये हनी ब्रदर, ई राजनीति भी बड़ी निर्मोही होती है। पल भर में सब कुछ बदल जाता है। कल तक वहीं से पूरा सूबा चलाते थे, आज आंदोलन की कमान संभाले हैं। सड़क पर उतर गये हैं। यह वही आशियाना है, जिसके मुख्य द्वार पर एक बोर्ड लगा था: उस घर में दीया जलाना है, जहां वर्षो से अंधेरा है। अब वही दीया जलाने का दंभ हनी भाई कर रहे हैं और एएम साहब कह रहे हैं कि चारों तरफ अंधेरा है। अर आवास घेरने ही तो जा रहे थे, खाली कराने नहीं। वहां तक जाने देते, तो क्या बिगड़ जाता। चाबी तो दिल्ली वालों के पास है। पानी, गोली-लाठी की बौछार कर कमल ब्रांड वालों को बेदम कर दिया। भगवा झंडा वाले पानी के लिए ही तो चिल्ला रहे थे। अब उनके इस हाल से लालटेन-हाथ वाले और धनुषधारी मुस्कुरा रहे हैं। यही है सत्ता का कमाल और गुमान। और इसी को कहते हैं कहीं धूप-कहीं छांव।ड्ढr ं

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