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नरश अग्रवाल ने ‘साइकिल’ छोड़ी

सपा के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री नरश अग्रवाल ने शनिवार को विधानसभा की सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे दिया। विधानसभाध्यक्ष सुखदेव राजभर ने श्री अग्रवाल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने अग्रवाल की हरदोई विधानसभा सीट रिक्त घोषित कर दी। पूरी सम्भावना है कि नरश बसपा में शामिल होंगे। सपा के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने अग्रवाल को सत्ता लोभी बताया।ड्ढr पार्टी से इस्तीफा देने के बाद अग्रवाल ने कहा कि सपा में ‘चौकड़ी’ हावी है और पार्टी के कामकाज में भटकाव आ गया है। पार्टी के एक अन्य राष्ट्रीय महासचिव अमर सिंह पर परोक्ष रूप से हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि सपा को सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं की बजाए फिल्मी सितारों और कॉरपोरट घरानों के एजेंटों की ज्यादा आवश्यकता है। इसी का नतीजा है कि सपा सरकार के कार्यकाल में जनहित के काम नहीं हुए और पार्टी विस चुनाव में हारी। ‘काकस’ के खिलाफ आवाज उठाने वाले नेताओं को शक की नजर से देखा जा रहा है। इस बात को वह पार्टी फोरम पर कई बार उठा चुके हैं लेकिन चौकड़ी ने उन्हें ही शिकार बनाया। ड्ढr अग्रवाल ने कहा,‘मैं अपमानित होकर भी खामोश रहा।’ उन्होंने सपा अध्यक्ष से कहा कि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश की उपेक्षा कर रही है, इस पर बोला जाना चाहिए लेकिन चौकड़ी की वजह से पार्टी नहीं बोली। उलटा आरोप लगा दिया कि नरश विद्रोह कर रहे हैं। इन वजहों से उन्होंने पार्टी छोड़ दी।ड्ढr राजकुमार अग्रवाल भी देंगे इस्तीफा : पेज 10ड्ढr राजकुमार अग्रवाल भी देंगे विप से इस्तीफाड्ढr विशेष संवाददाता लखनऊ सपा और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद नरश अग्रवाल ने कहा कि जहाँ सच्चाई न सुनी जाए वहाँ रहने का क्या औचित्य। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि पार्टी के बड़े-बड़े नेता चौकड़ी के आगे नतमस्तक हैं। जिस किसी नेता ने चौकड़ी के खिलाफ बोलने की हिम्मत की उसे बाहर जाने को मजबूर कर दिया गया। वह अब किस दल में शामिल होंगे, इस सवाल पर अग्रवाल ने कहा कि उनकी अभी किसी दल से बातचीत नहीं हुई है लेकिन अगले दो-तीन दिन में वह फैसला लेंगे। उन्होंने बताया कि उनके साथी राजकुमार अग्रवाल भी विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। श्री अग्रवाल ने सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को भी पार्टी से इस्तीफे के कारणों के बार में बताते हुए एक पत्र भी लिखा है। पत्र में पार्टी में ‘काकस’ के हावी होने और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया है।रुपा के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री नरश अग्रवाल ने शनिवार को विधानसभा की सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे दिया। विधानसभाध्यक्ष सुखदेव राजभर ने श्री अग्रवाल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने अग्रवाल की हरदोई विधानसभा सीट रिक्त घोषित कर दी। पूरी सम्भावना है कि नरश बसपा में शामिल होंगे। सपा के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने अग्रवाल को सत्ता लोभी बताया।ड्ढr पार्टी से इस्तीफा देने के बाद अग्रवाल ने कहा कि सपा में ‘चौकड़ी’ हावी है और पार्टी के कामकाज में भटकाव आ गया है। पार्टी के एक अन्य राष्ट्रीय महासचिव अमर सिंह पर परोक्ष रूप से हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि सपा को सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं की बजाए फिल्मी सितारों और कॉरपोरट घरानों के एजेंटों की ज्यादा आवश्यकता है। इसी का नतीजा है कि सपा सरकार के कार्यकाल में जनहित के काम नहीं हुए और पार्टी विस चुनाव में हारी। ‘काकस’ के खिलाफ आवाज उठाने वाले नेताओं को शक की नजर से देखा जा रहा है। इस बात को वह पार्टी फोरम पर कई बार उठा चुके हैं लेकिन चौकड़ी ने उन्हें ही शिकार बनाया। ड्ढr अग्रवाल ने कहा,‘मैं अपमानित होकर भी खामोश रहा।’ उन्होंने सपा अध्यक्ष से कहा कि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश की उपेक्षा कर रही है, इस पर बोला जाना चाहिए लेकिन चौकड़ी की वजह से पार्टी नहीं बोली। उलटा आरोप लगा दिया कि नरश विद्रोह कर रहे हैं। इन वजहों से उन्होंने पार्टी छोड़ दी।ड्ढr राजकुमार अग्रवाल भी देंगे इस्तीफा : पेज 10ड्ढr राजकुमार अग्रवाल भी देंगे विप से इस्तीफाड्ढr विशेष संवाददाता लखनऊ सपा और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद नरश अग्रवाल ने कहा कि जहाँ सच्चाई न सुनी जाए वहाँ रहने का क्या औचित्य। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि पार्टी के बड़े-बड़े नेता चौकड़ी के आगे नतमस्तक हैं। जिस किसी नेता ने चौकड़ी के खिलाफ बोलने की हिम्मत की उसे बाहर जाने को मजबूर कर दिया गया। वह अब किस दल में शामिल होंगे, इस सवाल पर अग्रवाल ने कहा कि उनकी अभी किसी दल से बातचीत नहीं हुई है लेकिन अगले दो-तीन दिन में वह फैसला लेंगे। उन्होंने बताया कि उनके साथी राजकुमार अग्रवाल भी विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। श्री अग्रवाल ने सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को भी पार्टी से इस्तीफे के कारणों के बार में बताते हुए एक पत्र भी लिखा है। पत्र में पार्टी में ‘काकस’ के हावी होने और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया है।

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