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ताजनगरी में एलआईयू स्टाफ पर्याप्त नहीं

प्रदेश में एलआईयू की हालत खराब है। कर्मचारियों के पास मोबाइल जसी जरूरी चीज तक नहीं है। आगरा जिले में मौजूद स्थानीय अभिसूचना इकाई में वर्तमान में अधिकारियों और कर्मचारियों सहित कुल 6लोग हैं। आधे स्टाफ की तैनाती पासपोर्ट, वीजा, रकार्ड आदि मेनटेन करने के लिए है। शेष को फील्ड में उतारा गया है। एलआईयू को ताजमहल, आगरा किला, सिकंदरा, फतेहपुर सीकरी, एत्माउदद्दौला आदि ऐतिहासिक इमारतों के अलावा जिले में होने वाली प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखनी पड़ती है।ड्ढr संसाधन न होने की वजह से मुखबिर तंत्र कमजोर पड़ता जा रहा है। आए दिन वीआईपी मूवमेंट और राजनीतिक प्रदर्शनों के कारण एलआईयू के अधिकारी और कर्मचारी दूसर कामों में उलझे रहते हैं।ड्ढr अलीगढ़ में भी यही हालड्ढr सांप्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील अलीगढ़ में स्टाफ की कमी है। जश ए मोहम्मद की ताजा धमकी के बाद इस ओर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। वर्तमान में अधिकारियों और कर्मचारियों सहित कुल 55 लोग हैं। आधा स्टाफ कार्यालय में तैनात है बाकी फील्ड में। मंडल बनने के बात कार्यालय और फील्ड दोनों के कार्य में बढ़ोत्तरी हुई है। प्रतिबंधित संगठन सिमी की जन्मस्थली, आतंकी गतिविधियाँ, बाहरी छात्रों का अध्ययन करने आना और यूपी की क्राइम बेल्ट में स्थित होने के कारण यहाँ की संवेदनशीलता काफी ज्यादा है।ड्ढr संसाधनों की कमी है मथुरा मेंड्ढr मथुरा में तैनात एलआईयू कर्मियों के पास कोई चौपहिया वाहन नहीं है। इंस्पेक्टर के पास मात्र एक वायरलेस सेट है। कुल 72 एलआईयू कर्मी हैं। इनमें 58 कर्मी श्रीकृष्ण जन्म स्थान पर तैनात हैं। इनमें एक इंस्पेक्टर व अन्य कांस्टेबिल व हेडकांस्टेबिल हैं। कुल 14 एलआईयू कर्मियों में से एक सब इंस्पेक्टर सहित आठ कर्मी कार्यालय की कमान सम्हाले हुए हैं। कुल छह एलआईयू कर्मियों द्वारा फील्ड में कार्य किया जाता है।ड्ढr अयोध्या-फैााबाद में दरोगा-सिपाहियों की कमीड्ढr जगह पाँच तैनात हैं। दो इंस्पेक्टर होने चाहिए तो एक है। दस हेड कांस्टेबिलों की जगह सिर्फ एक की ही तैनाती है। इससे एलआईयू के कामकाज की गुणवत्ता का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। संसाधनों के नाम पर पूर स्टाफ के पास सिर्फ एक दफ्तर, एक जीप, एक सीयूजी और एक बेसिक फोन है। सूचना जुटाने के लिए मिलने वाले सीक्रेट मनी भी ऊँट के मुँह में जीर की तरह है।ड्ढr सिमी के गढ़ कानपुर में हालत खराबड्ढr सिमी व अन्य आतंकी संगठनों के स्लीपिंग माडय़ूल्स का गढ़ माने जाने वाले कानपुर के 44 थानों वाले बड़े इलाके में एलआईयू के पास सिर्फ 85 लोगों का स्टाफ है जो पूर शहर की सूचनाएँ एकत्र करने के लिहाज से नाकाफी बताया जा रहा है।ड्ढr इनमें एक डिप्टी एसपी, तीन इंस्पेक्टर और 35 सब इंस्पेक्टर हैं। इन्हें आतंकियों से जुड़ी गतिविधियों को पता करने के अलावा विदेशी नागरिक सेल, पाक सेल, वीजा-पासपोर्ट और धरना-प्रदर्शनों का कामकाज भी देखना पड़ता है।ड्ढr वाराणसी में कुछ नई चीजें आईंड्ढr वाराणसी में एलआईयू को हाल ही में हैंड हेल्ड सेट, मेटल डिटेक्टर व कुछ अन्य उपकरण मिले हैं पर मानवीय संसाधनों के हिसाब से यहाँ का हाल भी यूपी के अन्य जिलों जसा ही है।ड्ढr सोर्स बनाने के लिए मिलने वाला पैसा कम है और गाड़ी-पेट्रोल आदि का खर्चा पास से ही करना पड़ता है। इस जिले की संवेदनशीलता विदेशी पर्यटकों व तीर्थ स्थलों की वजह से काफी ज्यादा है। यहाँ पाँच दर्जन एलआईयू कर्मी काम कर रहे हैं।

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