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पाक मीडिया : बातचीत की हर ओर सराहना

पाकिस्तान में हुई विदेश मंत्रियों की बातचीत को प्राय: सभी समाचार पत्रों ने पहले पृष्ठ पर दिया और सम्पादकीय में भी महत्व दिया। प्राय: सभी ने यही कहा कि श्री प्रणव मुखर्जी और महमूद कुरैशी की बातचीत में कोई खास नतीजा नहीं निकला सिवाय इसके कि दोनों देशों नेबंदियों को कौंसलर की सुविधा प्रदान कर दी ताकि इनके केस का जल्दी निबटारा कर बंदियों की रिहाई को तेज कर दिया जाए। सरबजीत का मामला लगता है सामने नहीं आया। पिछले दो हफ्तों से पाकिस्तान में सरबजीत की रिहाई के खिलाफ आवाजें उठाई जा रही हैं। जमायते इस्लामी सरबजीत को जल्दी फांसी देने के हक में है। यह बात अब तूल पकड़ गई है कि पहले पाकिस्तानी बंदी तिहाड़ जेल में मर गया (कहा जाता है कि बीमार था) और अब अमृतसर जेल में एक पाकिस्तानी महिला बंदी की मौत हो गई। पाकिस्तान में कई लोग सरबजीत को छोड़ने की एवज में अफाल गुरु को छुड़वाना चाहते हैं। दि न्यूज, दि नेशन और डॉन में बातचीत को सराहा गया है। सभी समाचार पत्रों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की संभावित आगामी यात्रा को खास अहमियत दी है। कश्मीर और जयपुर के मामले भी यह वातावरण नहीं खराब कर सके। पाकिस्तान के ‘ग्रैंड रिकासिलियन’ के प्रस्ताव को काफी महत्व दिया जा रहा है। हालांकि यह क्या प्रस्ताव है, अभी सामने नहीं आया, पर इससे पीछे की कटुता को छोड़ कर आगे बढ़ने के प्रस्तावों को सामने लाना होगा। इस मौके पर जब नई सरकार ही अपने बीच के मतोदों पर उलझी हुई है, इससे ज्यादा क्या मुमकिन था।ड्ढr प्रणव मुखर्जी से बातचीत में आसिफ जरदारी ने बेनजीर भुट्टो के कत्ल की राष्ट्रसंघ द्वारा जांच की मांग कर भारत सरकार की मदद मांगी। उन्होंने पूछे जाने पर बताया कि भारत का क्या सरकारी रवैया होगा, पर मुखर्जी ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहानुभूति जताई। उन्होंने कहा कि पीपीपी राष्ट्रसंघ पर अपनी मांग जारी रखे, पर अगर दोनों देश एक साथ मांग करं तो पहली बार ऐसा होगा।ड्ढr दि न्यूज ने लिखा है कि आसिफ जरदारी का मुशर्रफ के प्रति सख्त रवैया जो अब सामने आया है। पत्र को विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ संवैधानिक संशोधन को सहमति नहीं दे रहे। राष्ट्रपति सदन को भंग करना या उच्च सेनाअधिकारियों की नियुक्ित और बर्खास्तगी इत्यादि जो अधिकार उनके पास हैं, को अपने हाथ से जाना नहीं देना चाहते। इस समय वह प्रधानमंत्री और सरकार या सेनापति इत्यादि को भी निकाल सकते हैं। अब सरकार उनको रस्मी राष्ट्रपति बनाना चाहती है जो मुशर्रफ को मंजूर नहीं। पत्र कहता है कि आसिफ जरदारी और बेनजीर भुट्टो पर जो मुकदमें चल रहे थे (देश और देश के बाहर) सरकार ने मुशर्रफ के कानून ‘एआरओ’ के अधीन वापिस ले लिए थे। मुशर्रफ ने आसिफ जरदारी को चेतावनी दी है कि अगर वह अपनी कार्रवाई से बाज नहीं आए तो यह कानून फिर रद्द किया जा सकता है। जरदारी अब कह रहे हैं राष्ट्रपति मुशर्रफ को अब जनता की आवाज पर बाहर जाना ही पड़ेगा। हालांकि उनके पास जबरदस्त संवैधानिक अधिकार हैं। उसी आवाज में उन्होंने कहा कि हो सकता है कि मुझे और सरकार को ही बाहर कर दिया जाए या फिर मुझे कारागार ोज दिया जाए।ड्ढr संविधान का संशोधन जिसमें कोई 20 धाराओं का संशोधन शामिल है, कोई आसान बात नहीं। दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए। इसके अलावा जजों की बहाली का मुद्दा नवाज शरीफ की पहली मांग है और उन्होंने साफ किया जो भी हो, चाहे सरकार ही टूटे इस पर कोई लिहाज नहीं होगा। अगर ऐसा ही चला, तो क्या अगले दो-तीन महीनों में भी कुछ नहीं होगा। जो भी हो मुशर्रफ ही सबसे बड़ी रुकावट है। मुशर्रफ अपनी धाक जमाए हुए हैं। चार महीने होने को आए वह अभी भी ‘आर्मी हाउस’ में रह रहे हैं। कायदे से उन्हें यह घर खाली कर देना था और नए सेनापति जनरल अशफाक कियानी को इस घर में आना था।ड्ढr बिहारियों का मामलाड्ढr पूर्वी पाकिस्तान जो 1में पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश बन गया था, उस वक्त की बिहारी नागरिकों के लिए यह एक बड़ी दर्दनाक और न खत्म होने वाली समस्या बन गया था और अब इसमें राहत के आसार हैं। डॉन ने अपने सम्पादकीय में बांग्लादेश हाईकोर्ट के इस फैसले को ऐतिहासिक बताया कि बांग्लादेश के बनने के समय जो किशोर थे अथवा 1े बाद पैदा हुए अब बांग्लादेश के नागरिक हो जाएंगे। अभी तक न तो पाकिस्तान न बांग्लादेश इनको अपनाने के लिए तैयार थे। बांग्लादेश में उन्हें भूले-भटके पाकिस्तानी करार दिया जाता रहा है। इनके 60 झुग्गी झोपड़ी कैंप और प्रत्येक घरबार को 8 बाई 8 फुट जगह दी गई और अभी तक बड़े अमानवीय स्थिति में रह रहे थे।

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