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राज्य में एसजेएसआरवाइ फ्लॉप

ेंद्र सरकार की स्वर्ण जयंती शहरी रोगार योजना (एसजेएसआरवाइ) झारखंड में फ्लॉप रही। यह योजना एकीकृत बिहार में वर्ष 1में लागू की गयी थी। इसका उद्देश्य नगर निगम, नगरपालिका एवं अधिसूचित क्षेत्र समिति में गरीबी रखा से नीचे के लोगों को रोगार मुहैया कराना था। झारखंड में दो नगर निगम,1नगरपालिका एवं 18 अधिसूचित क्षेत्र समितियां हैं। 1में केंद्र प्रायोजित शहरी गरीबी उन्मूलन योजना, नेहरू रोगार योजना एवं प्रधानमंत्री शहरी गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम को समाप्त कर यह योजना शुरू की गयी थी।ड्ढr पिछले आठ साल में केंद्रांश एवं राज्यांश मिलाकर इस योजना मद में कुल 2,511.18 लाख रुपये दिये गये। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 1,075.48 लाख तथा राज्य सरकार का 1,435.70 लाख रुपया था। 31 जनवरी 2008 तक मात्र 860.22 लाख रुपये खर्च हुए हैं। शेष 1,650.लाख रुपये बैंक में पड़े हैं। नगर निगमों को 7लाख, नगरपालिकाओं 822.72 लाख तथा अधिसूचित क्षेत्र समितियों को 8807 लाख रुपये मिले। अधिसूचित क्षेत्र समितियों में सबसे अधिक जमशेदपुर को 410 लाख तथा मानगो को 105.06 लाख रुपये दिये गये। पिछले आठ वित्तीय वर्षो में आवंटित राशि के खर्च के आंकड़ों से इस योजना की उपलब्धि का अंदाजा लगाया जा सकता है।ड्ढr विदित हो कि इस योजना में दसवीं कक्षा से कम पढ़े लोगों को प्रशिक्षित कर स्व-रोगार एवं मजदूरों को रोगार मुहैया कराना था। इसमें महिला लाभार्थियों की संख्या 30 प्रतिशत अनिवार्य है। विधवा, तलाकशुदा एवं एकल महिला (परिवार में अकेले कमाने वाली महिला) को विशेष प्रमुखता देनी है। अल्पसंख्यक समुदायों के लिए 15 प्रतिशत आरक्षण है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिलाओं एवं विकलांगों को प्रमुखता देनी है। ं

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