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कर्नाटक में कमल की होली व दीवाली

भाजपा के लिए ओद्य रहा दक्षिण का किला आखिर कर्नाटक के जरिये टूटा। बी. एस. येदीयुरप्पा को विधायक दल का नेता चुनने की औपचारिकताएं सोमवार को पूरी कर ली जाएगी और उसके बाद पार्टी सरकार बनाने का दावा करेगी। जरूरी आंकड़े से पार्टी तीन सीट पीछे है लेकिन उसने दावा किया है कि चार निर्दलीयों ने उसे समर्थन देने का भरोसा दिया है। कर्नाटक में भाजपा की जीत को ग्रामीण और शहरी मतदाताओं की कॉकटेल कह सकते हैं। असल में कर्नाटक में भाजपा एक ग्रामीण पार्टी के रूप में थी। येदीयुरप्पा का जनाधार ग्रामीण इलाकों में था। उसने अपनी शहरी छवि को यहां इंपोर्ट कर यह जीत दर्ज की है। नए परिसीमन में शहरी क्षेत्रों के विस्तार का भी उसे फायदा मिला। रणनीतिक कौशल पार्टी महासचिव अरुण जेटली का था और उनकी टीम के सदस्यों- अमिताभ सिन्हा, सिद्वार्थ सिंह और बाला सुब्रमण्यम ने इसे अंजाम दिया। लगातार कोशिशों की बदौलत यहां तक पहुंची पार्टी ने इस बार जातिगत आधार पर भी सबसे पहले लिंगायतों में अपना आधार प्रबल किया। इसी को केंद्र बनाकर आगे वह सर्वजन की पार्टी में तब्दील हो गई। उसने राज्य की सभी जातियों को प्रतिनिधित्व दिया। बसपा सुप्रीमो मायावती की मौजूगी के बावजूद उसने 34 सुरक्षित सीटें जीती हैं। मायावती ने 217 सीटों पर उम्मीदवार उतार थे लेकिन उनकी यहां एक न चली। भाजपा इस जीत से इतनी उत्साहित है कि उसे दिल्ली पहुंचना आसान लग रहा है।

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  • Web Title: कर्नाटक में कमल की होली व दीवाली