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धरी रह गई ददन की दबंगई

वोट मांगने का समय हो तो दबंगई धरी रह जाती है। बिहार के दबंग माने जाने वाले नेता ददन सिंह उर्फ ददन पहलवान से पूछिए तो शायद वे भी इन दिनों यही कहेंगे। वे निर्दलीय उम्मीदवार हैं और इन दिनों हेलीकॉप्टर से प्रचार करने के कारण चर्चा में हैं। पहले उनके दर्द का कारण। वे शनिवार को प्रचार करने पहुंच गए अटांव गांव। सड़क समेत अन्य बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे इस गांव के लोगों ने वोट न करने का निश्चय कर रखा है। गांव के बाहर ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का नारा लिखा बैनर टांग दिया गया है। लोग पहरा दे रहे हैं ताकि कोई प्रत्याशी आए तो उसकी ‘खबर’ ली जाए। यह सब ददन को बता दिया गया था। लेकिन उन्होंने पत्रकारों-छायाकारों से कहा कि उन्हें कोई नहीं रोकेगा, चलकर देख लो। जब वे पहुंचे तो उन्हें भारी आक्रोश से जूझना पड़ा। लाठी-डंडे व बांस-बल्ले से लैस लोग ‘वापस जाओ-वापस जाओ’ के नार लगा रहे थे। इनमें महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में थे। भीड़ ने धूल-मिट्टी भी फेंका। मिट्टी के एक बड़े टुकड़े से ददन को चोट भी लगी। अंतत: ददन को अपनी बात रखे बिना लौटना पड़ा। अपनी खीझ मिटाने के लिए उन्होंने यह जरूर कहा कि ग्रामीणों का गुस्सा स्वभाविक है। वैसे, उन्होंने यह दावा भी किया कि किसी एमपी-मुखिया-सरपंच ने वहां विकास नहीं कराया लेकिन उन्होंने अपने विधायक कोष से पहले ही 25 लाख रुपये सड़क निर्माण के लिए दिए हैं। ददन लालू-राबड़ी शासन में मंत्री रह चुके हैं। पहलवानी का शौक है। मंत्री रहते हुए अपने आवास में अखाड़ा खुदवाना चाहते थे। लालू से नहीं पटी तो सपा में चले गए। एकबार वाराणसी में एक महिला के साथ भी पाए गए थे। उस वक्त उनकी पत्नी ने बड़ा हंगामा किया था। इसी आरोप में सपा से निकाले गए। अब एमपी बनना चाहते हैं।

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