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दो हिस्सों में बंट रहा भारत

भारत तेजी से दो हिस्सों में बंट रहा है। एक हिस्सा धनी वर्ग का है, जबकि दूसरा गरीब तबके का। इनके बीच की खाई बढ़ती ही जा रही है। ग्रामीण और शहरी भारत स्पष्ट रूप से दो भाग में नजर आता है। शिक्षा के प्रचार-प्रचार से ही इस खाई को पाटा जा सकता है। कुछ ऐसे ही उद्गार व्यक्त किये कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव सह एनएसयूआइ की राष्ट्रीय प्रभारी मीनाक्षी नटराजन और संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नदीम जावेद ने। दोनों राष्ट्रीय नेता 25 मई को प्रदेश एनएसयूआइ की ओर से आयोजित छात्र सम्मेलन में बोल रहे थे। गुरुनानक स्कूल सभागार में आयोजित सम्मेलन का विषय था- भारत में शिक्षा की उपलब्धियां और चुनौतियां।ड्ढr मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि बढ़ती दूरी का ही नतीजा है कि देश में आज तक एक भी आदिवासी वैज्ञानिक अथवा उद्योगपति नहीं है। देश के सर्वागीण विकास के लिए युवा छात्रों को आगे आना होगा। छात्र संघ के चुनाव में लोकतंत्र की बहाली, कैंपस को अपराध मुक्त बनाने और राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए अभियान चलाना होगा। शिक्षा प्रणाली में कई खामियां हैं, जिन्हें दूर करना होगा। एनएसयूआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नदीम जावेद ने कहा कि संगठन का मकसद सिर्फ नेता पैदा करना नहीं, बल्कि छात्रों का चहुंमुखी विकास करना है। संगठन इसी दिशा में प्रयासरत है। गांव-गांव तक शिक्षा का अलख जगाने की कोशिश हो रही है। अमीरी और गरीबी, शिक्षित और अशिक्षित की खाई इसी से भर पायेगी। सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष परविंदर सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार दुबे, संजय लाल पासवान, प्रदीप तुलस्यान, डॉ केपी सिंह, विनय सिन्हा दीपू सहित कई अन्य ने विचार रखे।ड्ढr डोनेशन बंद हो : एनएसयूआइहिन्दुस्तान ब्यूरो रांची इंजीनियरिंग-मेडिकल सहित अन्य तकनीकी संस्थानों में दाखिले के लिए डोनेशन सिस्टम तत्काल बंद किये जायें। पूर भारत में एक समान शिक्षा नीति लागू हो और सभी को बराबर अवसर उपलब्ध कराये जायें। उक्त मांगें प्रदेश एनएसयूआइ की ओर से 25 मई को आयोजित छात्र सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने रखी। उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति ने बच्चों को रटंत बना दिया है। इनकी रचनात्मक और सृजनात्मक क्षमता समाप्त हो गयी है। अब एनएसयूआइ को पहल करनी होगी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दुबे ने जेपीएससी पर निशाना साधा। कहा कि यहां पैरवी वालों की बहाली की जा रही है। डॉ केपी सिंह ने प्रस्तावित यूनिवर्सिटी में योग्य लोगों को कुलपति बनाने की मांग की। रांची विवि अध्यक्ष संजय कुमार ने वैश्वीकरण और उदारीकरण के इस दौर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर बल दिया। मनमोहन प्रसाद ने सुदूर इलाके तक शिक्षा की रौशनी पहुंचाने पर बल दिया। सम्मेलन में संजय पासवान, शहबाज अहमद, चयनिका, सुरंद्र शर्मा, नरश ठाकुर, नलिनी सिंह, मनोज चौधरी, वसीम हाशमी, अभिजीत राज, वेदप्रकाश, रानीश सिंह, सुरश पूर्ति ने विचार रखे।ड्ढr ं

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