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पेट्रोलियम पदार्थो का विकल्प तलाशना होगां

उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्य की कृषि व्यवस्था जिस प्रकार पेट्रोलियम पदार्थो के आसपास खड़ी है उससे आगे चलकर परशानी बढ़ेगी। पेट्रो पदार्थो की कीमत में उछाल के साथ कृषि लागत बढ़ेगी और किसान घाटे में होंगे। हमें इसका विकल्प तलाशना होगा और गैर पारंपरिक ऊरा श्रोतों को विकसित कर कृषि उपकरणों को उसके अनुरूप बनाना होगा। वे पटना, नालंदा और मुजफ्फरपुर जिलों के कृषि विकास की योजना बनाने के लिए बामेति द्वारा आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। आईसीएआर परिसर में कृषि निदेशक डा. एन सरवण कुमार की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तक कृषि विकास में जो कुछ हुआ वह किसानों की बदौलत।ड्ढr ड्ढr पहली बार सरकार भी किसानों के बार में सोच रही है। केन्द्र में बनीं योजनाएं किसानों पर थोप दी जाती थीं। परिणाम यह हुआ कि कृषि प्रधान भारत का कभी सिरमौर रहा बिहार आज इस क्षेत्र में अंतिम पायदान पर है। केन्द्र की एक योजना के अनुसार बाढ़ के समय उन्हीं पशुपालकों को योजना का लाभ मिलेगा जो राहत कैम्प में रहेंगे। इसी तरह मछली का बीज(ाीरा) नष्ट होने पर मुआवजा मिलेगा लेकिन मछली मरने पर नहीं। ऐसी योजना बनाने वाले धरातलीय सच्चाई से अवगत नहीं होंगे। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होगी कि राहत शिविरों में पहुंचने के लिए भी बाढ़ उतरने की प्रतीक्षा करनी होती है। और तबतक कितने पशुपालक कंगाल हो चुके होते हैं। इसीलिये राज्य सरकार ने यह फैसला लिया कि अब योजना गांवों में बनेगी और ‘नास’ ने इस चुनौती को स्वीकार कर लिया तो हमें खुशी हुई। कार्यशाला को कृषि निदेशक डा. एन सरवण कुमार के अलावा डा. आर बी सिंह, प्रो. ए के निगम आदि ने संबोधित किया। संचालन बामेति के निदेशक डा. आर के सोहाने ने किया।ं

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