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पंचायतों में लगेगा किसानों का दरबार

पंचायतों में लगेगा किसानों का दरबार। दरबार में हाजिर होंगे कृषि वैज्ञानिक जो किसानों से करंगे सवाल- आप क्या खायेंगे, क्या पीयेंगे और क्या लेकर परदेश जायेंगे। मतलब किसान किस फसल की खेती करना चाहते हैं? जल प्रबंधन के लिए उनके यहां कौन सी योजना लाभकारी होगी? और उनकी उन्नति के लिए सरकार को क्या करना चाहिए?ड्ढr ड्ढr ्र वैज्ञानिक पूरक सवाल भी करंगे जो किसानों के जवाब से ही संबंधित होंगे। कई दिनों तक वहां होती रहेगी मथापच्ची। फिर किसानों के जवाब, जल की उपलब्धता और मिट्टी के स्वास्थ्य के आधार पर ही बनेगी उस इलाके की योजना। यह कोई सपना नहीं है एक हकीकत है जो कल से ही गांवों में दिखने लगेगी। फिर बिहार होगा वह पहला प्रदेश जहां जरूरतमंद किसानों की राय पर बनेगी उनके विकास की योजना। 17 फरवरी को भी ऐसी ही एक पहल राज्य में हुई थी जब कृषि रोड मैप पर किसानों की राय जानने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसान पंचायत बुलाई थी। लेकिन तब गांव से किसान पटना आये थे। आज योजनाकार ही गांवों में जायेंगे। हर इलाके की अलग-अलग एग्रो क्लाइमेटिक स्थिति है। एक ही योजना पूर राज्य में लागू नहीं की जा सकती।ड्ढr ड्ढr अब इस स्थिति को सरकार ने भांप लिया है और जिलों की योजना गांवों की जरूरत के अनुसार बनाने का फैसला लिया है। लेकिन अभी यह तीन जिलों में ही शुरू होगी। पटना, नालंदा और मुजफ्फरपुर इन तीन जिलों का चयन पहले चरण में किया गया है। खेतों में उतरने के पूर्व की तैयारी पूरी हो गई। अब कल से गावों में माथापच्ची होगी। मुजफ्फरपुर की योजना जुलाई तक तैयार हो जायेगी तो पटना और नालंदा की योजना अगस्त तक पूरी होगी।

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