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10 अप्रैल, 2020|2:53|IST

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 इटावा। हिन्दुस्तान संवाद।  गुरुवार को वशि्व पर्यावरण दिवस मनाया जाएगा। एक बार फिर बिगड़ते पर्यावरण पर चिंता जताई जाएगी और पर्यावरण की हिफाजत करने के लिए बड़ी बड़ी बातें भी होंगी। लेकिन इस एक दिन की चिंता से न तो वन बचेंगे और न ही प्राणियों का जीवन बचने वाला है।

पेड़ो का कटान अंधाधुंध जारी हैं और पौधरोपण के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति कर ली जाती है। समाजसेवी संस्थाओं के स्तर पर लगाए गए पेड़ तो कहीं कहीं दिख भी जाते हैं लेकिन सरकारी पेड़ कागजों पर भले ही लगे हो लेकिन जमीन पर दिखाई नहीं देते। और तो और बड़े् बड़े् पेड़ो को काटने के लिए खुलेआम आरा चलाया जा रहा है। प्रतविर्ष 5 जून को वशि्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इसीक्रम में आज गुरुवार को एक बार फिर वशि्व पर्यावरण दिवस मनाया जाएगा।

हालांकि अभी मौसम वृक्ष लगाने की इजाजत नहीं दे रहा है क्योंकि ऐसी भीषण गर्मी में पेड़ सूख जाएंगे। इसलिए जो तैयारियां चल रही है उसके तहत ऐसी संभावनाएं है कि गोष्ठियां आदि करके पर्यावरण दिवस की रस्म अदायगी कर ली जाएगी। यदि इन दिनों पौधा रोपण किया भी किया तो पौधों की जीवित रहने की गारंटी नहीं है। आये दिन पर्यावरण को लेकर होने वाले खतरों की चर्चा होती रहती है तथा इस पर चिंता भी जताई जाती है लेकिन ठोस रूप से पर्यावरण को बचाने के लिए कोई विशेष उपाय नहीं किए जा रहे है।

वन विभाग द्वारा प्रतविर्ष वृक्षारोपण का अभियान चलाया जाता है और कुछ पौधे जमीन पर और कुछ जमीन पर लगा दिए जाते है, लेकिन देख रेख के अभाव में सरकारी पौधे दिखाई नहीं देते। समाजसेवी संस्थाओं द्वारा भी पौधारोपण का कार्य बरसात के दिनों में किया जाता है और संस्थाओं द्वारा लगाए गए पौधे जरूर दिखाई दे जाते है। जानकारों का कहना है कि कुछ भूमि के 33 प्रतिशत स्थान पर वन क्षेत्र होना चाहिए लेकिन हालत यह है कि 9 प्रतिशत क्षेत्र भी वन क्षेत्र नहीं रह गये हैं।

बिना पेड़ पौधे के पर्यावरण बचना वाला नहीं है और कड़वी सच्चाई यह है कि पेड़ लगाए कम जा रहे हैं, काटे अधिक जा रहे है। इनसेट- बिना पेड़ो के नहीं बचेगा पर्यावरण- डा. राजीव इटावा। पर्यावरणविद डा.राजीव चौहान का कहना है कि पर्यावरण सुरक्षित रहे। इसके लिए पेड़ पौधे बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि ग्रीन कवर बना रहे तथा ग्लोबल वार्मिग के खतरे को टाला जा सके। इसके लिए यह बहुत जरूरी है कि पर्याप्त संख्या में पेड़ पौधे मौजूद रहें, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।

पेड़ पौधों की कमी पेड़ पौधों की कमी पर्यावरण के लिए स्पष्ट रूप से खतरा बन गई है। जरूरत इस बात की है कि पौधा रोपण तथा पहले से लगे हुए पौधों को बचाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं तभी पर्यावरण सुरक्षित रह पाएगा और धरती पर प्राणियों का जीवन भी सुरक्षित रहेगा।

 

तो बोतलों में बिकेगी आक्सीजन- डा. शैलजा इटावा। पर्यावरण के लिए कार्य कर रही संस्था स्वामी विवेकानंद सेवा संस्थान की महिला शाखा की संयोजक डा. शैलजा दीक्षित ने पेड़ो के कटान व पौधा रोपण की कमी पर चिंता जताई है।

उन्होंने कहा है कि पेड़ जीवन के लिए बहुमूल्य आक्सीजन देते हैं और हमें नुकसान पहुंचाने वाली कार्बनडाई आक्साइड को अवशोषित करते हैं। यदि पेड़ो की संख्या में इसी तरह कमी आती रही तो पेड़ो से मिलने वाली आक्सीजन भी कम हो जाएगी और कभी ऐसी स्थिति भी आ सकती है कि आज जिस तरह मिनरल वाटर बोतलों में बिकता है उसी तरह आक्सीजन भी बोतलों में बिकने लगे।

पर्यावरण के लिए जागरूकता जरूरी- डा. शैलेंद्र इटावा। इतहिास के प्रोफेसर डा. शैलेंद्र शर्मा का कहना है कि पर्यावरण को लेकर सिर्फ चिंता चलाने से काम नहीं चलेगा बल्कि इस संबंध में लोगों को विशेषकर युवा पीढ़ी को जागरूक करना होगा।

उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिग के खतरे को लेकर पूरे वशि्व में चिंता जताई जा रही है और केवल पेड़ लगाकर ही हम इस संकट से छुटकारा पा सकते हैं। इसलिए जरूरत इस बात की है कि नई पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करके पेड़ लगाने तथा बचाने के लिए प्रेरित किया जाए।

बरसात में होगा वृक्षारोपण- डीएफओ इटावा। प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी मानिकचंद्र यादव का कहना है कि वन विभाग द्वारा पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी वृक्षारोपण का कार्य किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस समय काफी गर्मी पड़ रही है इसलिए पौधारोपण उचित नहीं है। जैसे ही बरसात की शुरूआत होगी। जुलाई के महीने में वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण का कार्य किया जाएगा। इनसेट-फोरलेन की भेंट चढ़ गये डेढ़ हजार बड़े् पेड़ इटावा। सड़कों के चौड़ीकरण को लेकर ही पेड़ो को काटने का काम जारी है। इटावा से मैनपुरी के 55 किलोमीटर के मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है और इसे टू लेन से फोर लेन बनाया जा रहा है।

सड़क के चौड़ीकरण के इस कार्य में बड़ी संख्या में पेड़ काटे गये है। केवल इस 55 किलोमीटर की दूरी के लिए एक हजार 490 पेड़ो को काटने का कार्य किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में पेड़ो के कटान होने से पर्यावरण को कितना खतरा होगा। यह बात आसानी से समझी जा सकती है। इसके बावजूद कभी विकास के नाम पर तो कभी निर्माण के नाम पर पेड़ो को काटा जा रहा है। ं।

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  • Web Title:विश्व पर्यावरण दिवस: चिंता से न बचेंगे जंगल और न जीवन