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प्रवासी पक्षियों के आने से गुलजार हुआ दानापुर

प्रवासी पक्षी साइबेरियन क्रेन के छावनी क्षेत्र में पहुंचने के साथ ही दानापुर पक्षी बिहार में तब्दील हो गया। बरसात में जब झुंड के झुंड जांघिल आसमान में शोर करते हुए उड़ते हैं तो पूरी फिाां ही बदल जाती है। पिछले 5-6 दिनों से जांघिल का आना शुरू हो गया है। मानों उन्हें भी यह सूचना मिल गयी है कि मानसून राजधानी और आसपास के इलाकों में पूरी तरह सक्रिय हो गया है। झारखंड, उड़ीसा व बिहार सब एरिया मुख्यालय परिसर में वृक्षों पर जांघिल घोंसले बनाने में जुट गये हैं।ड्ढr ड्ढr गर्मी में जांघिल पेड़ों पर बैठै और आसमान में उड़कर मानसून का इंतजार कर रही है। सफेद व काले रंग के प्रवासी पक्षी जांघिल देखने में काफी खूबसूरत होते हैं। इसका वजन दो से तीन किलो तक होता है। जांघिल का भोजन मुख्यत: छोटी-छोटी मछलियां व पानी में रहने वाले कीड़े-मकोड़े होते हैं। जांघिल का यहां आना कब से शुरू हुआ, इसका कोई ठोस प्रमाण यहां के नागरिकों व सैन्य अफसरां के पास नही है। जांघिल मानसून में प्रत्येक वर्ष यहां आते हैं। प्रवास के दौरान यहीं अंडे देती हैं और बच्चे का लालन-पालन के साथ ही उड़ने के लिए दिये जाने वाले प्रशिक्षण का गवाह भी दानापुर ही बनता है। हाारों किमी दूरी तय कर पहुंचे हैं और शोर से भयभीत रहते हैं। संवेदनशील के साथ अनुशासित भी होते हैं। समूह में भोजन के लिए उड़ते हैं। उस समय इनकी छटा देखते ही बनती है। अपने हाव भाव व आकर्षण से जांघिल नागरिकों व सैनिकों के बीच कौतूहल का विषय बना रहता है। वही पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हें ओपन बिंड स्टॉर्क के नाम से जाना जाता है। वही सब एरिया कमांडर ब्रिगेडियर अभिमन्यु राउत ने बताया कि जांघिल छावनी क्षेत्र में अपने आपको सुरक्षित महसूस करती है और वर्षो से सेना इलाके के वृक्षों पर घोंसला बनाती है।ं

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