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गर्भाशय कैंसर में कॉल्पोस्कोपी कारगर

चितरांन कैंसर इन्स्टीच्यूट कोलकाता के प्रख्यात चिकित्सक डा. पार्थ एस बासु ने कहा कि विकासशील देशों में खासकर भारत वर्ष में गर्भाशय कैंसर रोगियों की संख्या सर्वाधिक पायी जाती है। 38 से 40 प्रतिशत महिलायें बच्चेदानी कैंसर से प्रभावित है। इसकी पहचान शुरू में कर इसे रोका जा सकता है।ड्ढr ड्ढr डा. बासु महावीर कैंसर संस्थान में कॉल्पोस्कोपी ट्रेनिंग प्रोग्राम के अवसर पर एक सभा को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने क हा कि कॉल्पोस्कोपी एक ऐसा उपकरण है जिससे जांच के साथ साथ चिकित्सा भी की जाती है। डा. बासु ने कहा कि इससे स्त्री रोग खासकर गर्भाशय कैंसर में इसकी भूमिका अहम हो जाती है।ड्ढr ड्ढr कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डा. जितेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि गर्भाशय में टय़ूमर के बढ़ने से यानि कैंसर मे तब्दील होने में 13 से 14 वर्ष लगता है। कॉल्पोस्कोपी की जांच से अत्यंत छोटे टय़ूमर के उसी अवस्था में पता चल जाता है। डा. सिंह ने बतया कि प्रारंभिक पहचान के बाद इसका इलाज आसान हो जाता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान डा. पार्थ एस बासु ने मल्टीमीडिया प्रणाली से कॉल्पोस्कोपी के गुणों को बतया। इसके बाद उन्होंने ऑपरशन थियेटर में जाकर कॉल्पोस्कोपी से जांच एवं इलाज करके बताया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीओजीएस, एफओजीएसआई और पीएमसीएच के स्त्री राग विशेषज्ञों सहित पीजी की छात्रोओं ने भी भाग लिया। इस मौके पर डा. शांति एचके सिंह, डा. मनीषा, डा. सुबोध सहित कइ्र्र गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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  • Web Title: गर्भाशय कैंसर में कॉल्पोस्कोपी कारगर