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अनुबंधित डॉक्टर हड़ताल पर

राज्य के 600 कांट्रैक्ट डॉक्टर रविवार आधी रात से हड़ताल पर चले गये। इससे ग्रामीण इलाकों के अस्पताल वीरान हैं, इमरोंसी सेवाएं भी बाधित। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि उनको स्थायी नियुक्ित में प्राथमिकता नहीं मिली, तो काम पर नहीं लौटेंगे। आइएमए और झारखंड हेल्थ सर्विसेज एसो. ने भी डॉक्टरों की मांगों का समर्थन किया है और 31 मई को राज्यव्यापी हड़ताल बुलायी है।ड्ढr कांट्रैक्ट चिकित्सक संघ के बिमलेश सिंह और आइएमए के राज्य सचिव डॉ आरसी झा ने कहा कि सात सालों में सरकार ने स्वास्थ्य सेवा सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाये। मंत्री सिर्फ आश्वासन देते रहे। कांट्रैक्ट पर पांच साल तक सेवा लेने के बाद डॉक्टरों को नौकरी में प्राथमिकता नहीं दी जा रही, जबकि सरकार ने आश्वासन भी दिया था। 7700 डॉक्टरों की की जरूरत है, सिर्फ 1070 डॉक्टरों की बहाली हो रही है। सरकार के उदासीन रवैये से ही कांट्रैक्ट डॉक्टरों को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ा है। पदाधिकारियों ने कहा कि अनुबंधित डॉक्टरों की सेवाएं नियमित नहीं हुइर्ं, तो सभी डॉक्टर सामूहिक इस्तीफा सरकार को सौंप देंगे। इनके समर्थन में आइएमए के आह्वान पर राज्य के सभी सरकारी और गैर सरकारी डॉक्टर 31 मई को हड़ताल पर रहेंगे। 28 मई को दो घंटे का सांकेतिक हड़ताल होगी। बर्खास्त होंगे हड़ताली :भानूड्ढr रांची। स्वास्थ्य मंत्री भानूप्रताप शाही ने कांट्रैक्ट डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि अगर डॉक्टर हड़ताल पर गये, तो बर्खास्तगी की कार्रवाई होगी। जेपीएससी से 1070 डॉक्टरों की नियुक्ित की जा रही है। इसमें तेजी लाने के लिए लिखेंगे। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की वेतन बढ़ोत्तरी की जा चुकी है। इसके बाद भी हड़ताल पर जाना उचित नहीं है। नियमित नियुक्ित में 10 नंबर की प्राथमिकता डॉक्टरों की मिल रही है। चिकित्सा व्यवस्था चलाने के लिए सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश दिये गये हैं।ड्ढr

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