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येदीयुरप्पा : क्लर्क से मुख्यमंत्री तक

र्नाटक की कमान संभालने जा रहे बोकांकर सिदालइंगप्पा येदीयुरप्पा की पहचान एक किसान नेता के रूप में रही है। 65 वर्षीय येदीयुरप्पा लंबे अरसे से राज्य में भारतीय जनता पार्टी के मुख्य नियंता रहे हैं। वह 23 साल की युवा अवस्था से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे और पहली बार तब सुर्खियों में आए जब उन्होंन शिमोगा के भूमिहीन किसानों और बंधुआ मजदूरों का मुद्दा उठाया। इसके साथ ही मलाड इलाके का यह पहाड़ी क्षेत्र येदीयुरप्पा की कर्मस्थली बन गया। इमरोंसी के दौरान वह कई मर्तबा जेल भी गए। येदीयुरप्पा 1में पहली बार राज्य विधानसभा के लिए चुने गए थे। तब राज्य में रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी थी और भाजपा ने जनता पार्टी को अपना समर्थन दिया था। वह इसके बाद वर्ष 1ो छोड़ लगातार पांच बार विधायक चुने जाते रहे। सात माह पहले आठ दिन मुख्यमंत्री रहने के बाद उन्हें तब कुर्सी छोड़नी पड़ी थी जब जेडीएस के एच.डी. कुमारस्वामी ने गठबंधन सरकार को सपोर्ट करने का अपना वादा तोड़ डाला। येदीयुरप्पा ने तभी एक तरह से प्रण कर लिया कि वह भाजपा को अपने दम पर राज्य में सत्ता की दहलीज पर ला खड़ा करेंगे। और उनका यही हुआ, आज वह घड़ी आ गई जब येदीयुरप्पा 25वें मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभालने जा रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि पर किसी को भी रश्क हो सकता है कि वह उस पार्टी को सत्ता में ले आए हैं जिसके पास दो दशक पहले तक राज्य में सिर्फ एक विधायक और 2.6 प्रतिशत वोटों का मामूली समर्थन था। येदीयुरप्पा सामाजिक कल्याण विभाग के एक क्लर्क से मुख्यमंत्री के ओहदे तक पहुंचे हैं। उन्होंने यह मुकाम एक लंबा रास्ता तय करने के बाद पाया है।

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