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नरेश ज्ञानेंद्र को सरकार ने चेताया

नेपाल सरकार ने मंगलवार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि अगर राजा ज्ञानेन्द्र स्वेच्छा से राजमहल नहीं छोड़ेंगे तो उनके खिलाफ बल प्रयोग होगा। उधर सरकार गठन पर पिछले कई दिनों से गतिरोध का कारण बने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पद पर देश की तीनों बड़ी पार्टियों के बीच समझौता हो गया है। ये पार्टियां संविधान सभा की पहली बैठक में देश को गणतंत्र घोषित करने पर सहमत हो गई है और आम सहमति बनी है कि राष्ट्रपति का पद संवैधानिक प्रमुख होगा जबकि प्रधानमंत्री देश के कार्यकारी प्रमुख होंगे। ज्ञानेन्द्र के महल छोड़ने पर शांति और पुनर्निर्माण मंत्री रामचन्द्र पौडेल ने कहा, ‘राजा को तत्काल महल खाली करके अपने निजी आवास निर्मल निवास चले जाना चाहिए। अगर वह महल नहीं छोड़ते तो सरकार इसे खाली कराने के लिए बलप्रयोग कर सकती है जो उनके लिए अच्छा नहीं होगा।’ हालांकि राजमहल की ओर से इसपर कोई टिप्पणी नहीं आई है। संविधान सभा के निर्वाचित सदस्यों को मंगलवार को वीरेन्द्र इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में शपथ दिलाई गई। यहीं पर बुधवार को संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन होगा। अमेरिका सहित विभिन्न देशों एवं संयुक्त राष्ट्र के अनेक वरिष्ठ अधिकारी इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के मद्देनजर काठमांडू पहुंच चुके हैं। उधर, तीनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं की यहां हुई बैठक में नेपाल को गणतंत्र घोषित करने पर सहमति हो गई तथा इस आशय के प्रस्ताव का मसौदा तैयार करने के लिए तीनों दलों के एक-एक सदस्यों को शामिल कर समिति बनाई गई है, जिसे बुधवार को संविधान सभा की प्रथम बैठक में पेश किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि संविधान संशोधन व राष्ट्रपति की नियुक्ित के मसलों पर मंगलवार को प्रधानमंत्री गिरिाा प्रसाद कोईराला के आवास पर हुई बैठक में तीनों पार्टियों में एक राय बन गई। हालांकि अभी कई बातों पर गतिरोध है। नेपाली कांग्रेस ने गणतंत्रात्मक स्वरूप के मद्देनजर अंतरिम संविधान के 60 प्रावधानों में संशोधन की आवश्यकता बताई जिसमें सरकार गठन एवं भंग करने के लिए दो-तिहाई की बजाय साधारण बहुमत की बात कही गई, पर माओवादियों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इससे देश में अस्थिरता आएगी।

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