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अरुण सरीन ने वोडाफोन छोड़ी

टेलीकॉम की दुनिया के सबसे बड़े सीईओ अरुण सरीन ने वोडाफोन से इस्तीफा दे दिया। वे जुलाई में पदमुक्त हो जाएंगे। भारत में वोडाफोन को लाने वाले अरुण सरीन ने उस समय यह कदम उठाया है जब वे अपने करियर के पीक पर थे। विक्रम पंडित (सिटी बैंक), इंदिरा नूयी ( पेप्सीको) के साथ वे भारतीय मूल के सबसे नामवर सीईओ थे। उनके नेतृत्व में पिछले वित्तीय साल में वोडाफोन का कुल मुनाफा करीब साढ़े छह अरब रूपये तक पहुंचड्ढr गया था। वोडाफोन के बाद क्या? टेलीकॉम विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अब अरुण सरीन प्राइवेट इक्िवटी के कारोबार में जा सकते हैं। वोडाफोन के कई सालों तक सव्रेसर्वा रहने के बाद अब वे सम्भवत: किसी कंपनी में जाना नहीं चाहेंगे। हालांकि राजधानी में एक चर्चा मंगलवार को यह भी तैरती रही कि वे शायद भारत की किसी प्रमुख मोबाइल कंपनी को ज्वाइन कर लें। भारती एयरटेल के अधिकारी ने इस संभावना से इंकार किया। उसका कहना था कि अरुण सरीन का कद इतना बड़ा हो चुका है कि अब कोई भी भारतीय कंपनी उनके लिए छोटी ही होगी। जानकार कहते हैं कि अरुण सरीन में इस बात को जानने-समझने की गजब की समझ रही है कि भविष्य में किन देशों में मोबाइल बाजार आगे बढ़ेगा। इस बात का गवाह वोडाफोन का पहले भारत में और उसके बाद तुर्की में दस्तक देना था। इन दोनों ही देशों को मोबाइल सेक्टर के लिए बेहद मुफीद मा*++++++++++++++++++++++++++++र्*ट माना जाता है।ड्ढr आईआईटी मुम्बई के पूर्व छात्र अरुण सरीन अब अमेरिका के नागरिक हैं और पिछले कई सालों से लंदन में ही रह रहे थेक्योंकि वोडाफोन का हेड ऑफिस लंदन में ही है। भारत में वोडाफोन को लाने के बाद उन्होंने राजधानी में पत्रकारों की एक टोली से कहा था कि मोबाइल के लिहाज से अब यूरोप का बाजार अपने चरम पर पहुंच गया है। अब वक्त भारत का है। जाहिर है कि इसीलिए उन्होंने हच में हिस्सेदारी ली। अरुण सरीन की ख्वाहिश वोडाफोन को चीन के बाजार में भी लेकर जाने की थी। लेकिन चीन के नियम इस तरह के हैं कि वहां पर कोई विदेशी मोबाइल कंपनी स्थानीय कंपनी में पांच प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं ले सकती।

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