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राजरंग

ुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो मंजूर लालू होता है। जलनेवाले जला करं, किस्मत अपने हनी ब्रदर के साथ है। कुर्सी हिलानेवालों सावधान! वो आये अपने द्वार, ये मिले उनसे जाकर और फिर पाया आशीर्वाद। अब क्या ख्याल है आपका। दिल्ली दौड़ लगाने से कौनो फायदा होवेवाला है? जब देवता साक्षात दरवाजे पर हाजिर हो जायें, तो मंदिर जाने की क्या जरूरत। किस्मतवालों को ही यह सौभाग्य मिलता है। सच कहिये तो हमको भी अपने हनी ब्रदर की किस्मत देख रस्क हो रहा है। क्या किस्मत पायी है ब्रदर ने। अलबत्त हो रहा है इनके साथ। लोग जेतना इनसे भड़ककर, नाराज होकर कुर्सिया हिलावे लगता है, इ और मजबूत हो जाते हैं। हटा देंगे, हटा देंगे, गिरा देंगे, गिरा देंगे.. सुनते-सुनते तो हनी ब्रदर का कान पक गया है। केतना सुनें। आखिर कोइयो चीज का लिमिट है कि नहीं। साथे चलना है तो चलिये नय तो रास्ता किनार कर लीजिये। अब किस्मतवा तो नय न छीन लीजियेगा। जो किस्मत में लिखल है, उ तो भोगना ही पड़ेगा। देवता आये और भक्त उनका चरण रा लेकर गद्गद् होकर लौटे। जो बनाया है, वही बिगाड़ सकता है, इ दुनिया जानती है। फिर डर काहे का। डोंट वरी बी हैप्पी।

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