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24 घंटे से नहीं जला संतोष के घर चूल्हा

गरीबी इस झोपड़ी में आकर दम तोड़ देती है। उसी में रहता था 15 वर्षीय संतोष अपने पांच भाई-बहनों और माता-पिता के साथ। कल शाम संतोष ने भी दम तोड़ दिया। एन.बी.सी.सी. का निर्माणाधीन नाला उसके लिए मौत का मुंह बना। कंकड़बाग थानांतर्गत मलाही पकड़ी इलाका। घटना के 24 घंटे बीत चुके हैं पर संतोष के छप्पर से नहीं उठा है चूल्हे का धुआं। हरिया-बर्तन छितराये पड़े हैं। झोपड़ी के बाहर बैठा है सिर छिलाये संतोष का पिता राजेन्द्र केवट। समीप ही टिकोले के चखना और तारी पर भीड़ जुटी है। झोपड़ी के अंदर संतोष की मां अब भी दहाड़ मार कर रो रही है ‘मोड़वा पर से घरवा आव हो बेटवा..अर बेटवा अंगना आवो..दुकनवा लगावे के बेरवा हो गेलउ र बेटवा..।’ड्ढr ड्ढr संवाददाता व छायाकार की गाड़ी देखते ही राजेन्द्र केवट आता है। ‘जी हमर बेटा डूब के मर गेलई। मछरी बेच के कउनो तरह परिवार के पाल हीं। चार गो बेटा और दू गो बेटी हई। संतोषवा तेसर नंबर के हल। कल्ले गिर के मर गेलई। कउनो मुआवजा देवे न आयेल। हमरा मुआवजा देआ दू हुजूर। बेटवा त मरिये गेलई।’ तभी राजेन्द्र की आवाज को दबाती हुई झोपड़ी के एकमात्र गेट के समीप संतोष की मां की चीत्कार आसपास फैल जाती है ‘कहां चल गेलई र हमार बेटवा.।’ नालंदा जिले के कराय परसुराय थानांतर्गत जुलबिगहा गांव के मूल निवासी राजेन्द्र केवट पिछले दो दशकों से मलाही पकड़ी इलाके में झोपड़ी बना कर परिवार के साथ रहता है। समीप ही सहनी चौक पर वह मछली बेचने का व्यवसाय करता है जिसमें संतोष के साथ ही अन्य बेटे भी मदद करते थे। पर अब संतोष नहीं रहा। तीन बेटे कारू कुमार (20), राकेश (6) व राजकुमार (5) और दो बेटियां सरिता (16) व अनिता (14) बची हैं। दुखद घड़ी में राजेन्द्र के साथ ही उसकी पत्नी के भी कई परिजन ढांढ़स बंधाने पहुंच चुके हैं। संतोष की मौत का जिम्मेदार कौन?ड्ढr पटना (हि.प्र.)। नाला निर्माण व सड़क चौड़ीकरण के लिए खोदे गये गड्ढे में गिरकर घायल होने और मरने वालों के लिए जिम्मेदार कौन है, यह एक अहम सवाल है। इस मामले पर किसी विभाग के अधिकारी, ठेकेदार या निर्माण कंपनी अपना मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं। सभी एक दूसर के सिर दोष मढ़ कर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं। राजधानी की तमाम सड़कों पर गड्ढे हैं। कई स्थानों पर सड॥क के किनार इतने बड़े गड्ढे हैं कि जिसमें गिरने पर बचना मुश्किल है। बरसात में जब इन गड्ढों में पानी भरगा तो उसका परिणाम क्या होगा सहा ही अंदाजा लगाया जा सकता है। जानकारों की मानें तो सघन आबादी वाले क्षेत्र में किसी तरह का निर्माण कार्य करने पर निर्माण स्थल पर अस्थायी बैरिकेडिंग और खतर का बोर्ड लगाया जाना आवश्यक है लेकिन नियम कानून को ताक पर रख कर निर्माण कार्य किया जाता है।

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