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यमराज बन गयीं हैं राजधानी की सड़कें

राजधानी की सड़कें इनदिनों ‘डेथट्रैप’ बन गयी हैं। कहीं नाला निर्माण के नाम पर तो सड़क चौड़ीकारण के लिए बड़े-बड़े गड्ढे खोदकर छोड़ दिये गये हैं। आये दिन इन गड्ढों में गिरकर लोग घायल हो जाते हैं। बरसात में स्थिति और भयावह होगी। आलम यही रहा तो गड्ढे में गिरकर मरने वालों की तादाद बढ़ जायेगी। शहर के कई प्रमुख सड़कों का निर्माण कार्य अधूरा है। इन पर इतने बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं कि संभल कर नहीं चलें तो जान जोखिम में पड़ सकती है। सोमवार को कंकड़बाग के मलाही पकड़ी में नाला निर्माण के लिए खोदे गये पानी से भर गड्ढे में डूबकर संतोष नामक बच्चे की मौत भी हो गई।ड्ढr ड्ढr इसी वर्ष मार्च में जलेश्वर मंदिर के पास इसी तरह के हादसे में दो लोगों का हाथ टूट गया था। उनमें एक महिला भी थी। यहां भी एनबीसीसी द्वारा नाला बनाया जाना है। कंकड़बाग टेम्पो स्टैंड से योगीपुर संप हाउस तक नाला निर्माण के लिए खोदे गये गड्ढे हैं। इसमें नागरिक सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया है। न तो अस्थायी बैरिकेडिंग है और न खतर का बोर्ड।ड्ढr अन्य स्थानों की स्थिति भी अलग नहीं है। इस संबंघ में पूछे जाने पर कंकड़बाग अंचल के कार्यपालक पदाधिकारी विनय शरण वर्मा ने बताया कि सघन आवादी वाले क्षेत्र में अस्थायी बैरिकेडिंग व खतर का बोर्ड लगाना चाहिए। जलजमावग्रस्त इलाकों में सड़कों पर इतने गड्ढे हैं कि उनकी गिनती भी नहीं की जा सकती है। वाहन चालकों को इन सड़कों पर गाड़ी चलाने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। कंकड़बाग,पोस्टलपार्क, चांदमारी रोड, इंदिरानगर, बहादुरपुर, जयप्रभा अस्पताल रोड, शालीमार मोड़ से टेम्पो स्टैंड, अशोकनगर, चित्रगुप्तनगर, डाक्टर्स कालोनी, पत्रकारनगर, कंकड़बाग पुराना बाइपास, आशियाना-दीघा रोड, मीठापुर- खगौल रोड, बोरिंग कैनाल रोड व बांकीपुर-दानापुर रोड समेत कई सड़कों की दुर्गति हो चुकी है। कहीं सड़क चौड़ीकारण का काम अधुरा है तो कहीं नाला बनाने का काम।

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