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4 जून के बाद पड़ सकती है फांसी, मर्सी अपील भेजी गई

अगर सुप्रीम कोर्ट या राष्ट्रपति के पास से प्रजीत कुमार सिंह की फांसी पर रोक से संबंधित कोई आदेश नहीं आएगा तो उसे 4 जून के बाद किसी भी दिन फांसी दी जा सकती है। कारा प्रशासन एक तरफ उसको फांसी देने की तैयारी कर रहा है तो दूसरी तरफ आदेश का इंतजार भी कर रहा है। कारा प्रशासन ने तैयारी के तहत जेल आईजी को पत्र भेजकर एक जल्लाद की मांग की है। प्रजीत कुमार सिंह की तरफ से दाखिल मर्सी आवेदन को विशेष दूत के माध्यम से सोमवार की रात मुख्यालय भेज दिया गया। इसकी सूचना संबंधित कोर्ट को भी भेजी गई है। कारा प्रशासन के अनुसार बेतिया कोर्ट के आदेश के अनुसार 4 जून और 12 जून के बीच प्रजीत कुमार सिंह को फांसी देनी है। इसके लिए अपने स्तर से तैयारी में कोई कमी कारा प्रशासन नहीं रख रहा है। फांसी के लिए दामोदर को भी कारा प्रशासन ने बुलाया। दूसरी तरफ मुख्यालय से भी जल्लाद की मांग की है।प्रजीत के परिजनों ने कारा प्रशासन को जानकारी दी है कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका स्वीकृत हो चुकी है। लेकिन इसकी आधिकारिक रूप से कारा प्रशासन को कोई सूचना नहीं मिली है। काराधीक्षक यूके शरण ने बताया कि आधिकारिक रूप से जबतक कोई आदेश नहीं आता है तब तक फांसी देने की तैयारी चलती रहेगी। प्रजीत को फांसी देने को दामोदर तैयारड्ढr भागलपुर (हि.प्र.)। नवगछिया अनुमंडल के इस्माइलपुर प्रखंड स्थित छोटी परबत्ता गांव में सामान्य सा दिखनेवाला दामोदर प्रजीत कुमार सिंह को फांसी देने के लिए तैयार है। केन्द्रीय कारा में अब तक दो लोगों को फांसी के फंदे पर लटका चुका दामोदर इस बार फांसी के एवज में नौकरी की मांग कर रहा है। परिजन भी इस बात से नाराज हैं कि इतना बड़ा काम कराने के बाद भी कारा प्रशासन एक नौकरी नहीं दे रहा है। दामोदर मंगलवार को काराधीक्षक से मिलकर अपनी मांगों को रख चुका है। हालांकि उसका मन नहीं करता है कि किसी को फांसी पर लटकाएं लेकिन पेट के कारण उसे यह सब करना पड़ता है।ड्ढr ड्ढr बेतिया के कोर्ट से प्रजीत को फांसी देने का आदेश मिलने के साथ ही केन्द्रीय कारा प्रशासन ने जल्लाद की खोज शुरू कर दी। कारा प्रशासन की तरफ से दामोदर को बुलाया गया। दामोदर ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा कि वह फांसी देने के लिए तैयार है। 1में उसने परमहंस यादव और भोला साह को फांसी पर लटकाया था। इसके एवज में पीकर तैयार होने के लिए 200-200 सौ रुपए मिले थे। जिस समय दोनों को फांसी दी गई थी उस समय वह कारा में सफाईकर्मी के पद पर काम करता था। 12 सौ रुपए महीना मिलता था। लेकिन 1में उसे छंटनी का कागज थमा दिया गया। इसके बाद इस बार कारा प्रशासन को उसकी याद आई है।

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