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साइकिल योजना : आधी हकीकत, आधा फसाना

राशि बैंक में, साइकिल से स्कूल जाना सपना :ड्ढr जिले की वीं क्लास की छात्राओं को स्कूल जाने के लिए साइकिल मुहैया कराने वाली राज्य सरकार की बालिका साइकिल योजना यहां आधी हकीकत -आधा फसाना की फांस में फंस गई है। बीते मार्च माह के पहले जब राज्य सरकार ने इस योजना की राशि भेजी तो जिले में वीं क्लास की तेरह हाार छात्राएं थीं। साइकिल के लिए प्रत्येक छात्राओं को 2000 रुपए देने थे। सरकार ने भेजे 8लाख रुपए, जो 4450 छात्राओं के बीच ही बंट सकती थी। हालांकि यह राशि भी अभी विभाग से स्कूल तक का ही सफर तय कर पाई है। इस बीच वीं की छात्राएं 10वीं में पहुंच चुकी है। डीईओ नवीन कुमार राक ने बताया कि राशि कम थी इसलिए कुल 14 बालिका स्कूलों में ही इसका आवंटन किया गया है। इसके अलावे अन्य उन ूलों में राशि भेजी गई, जिनमें छात्राओं की संख्या अधिक थी। स्कूल के प्रधानों की समस्या भी कम नहीं । शहर के घोषलेन बालिका हाई स्कूल की प्रिंसिपल सुशीला कुमारी बताती हैं कि बाजार में एक साइकिल की कीमत कम से कम 2200 रुपए है। घंटी, कैरियर अलग से। जबकि एक छात्रा को साइकिल खरीदने के लिए 2000 रुपए देना है। रास्ता दिखा रहा है मुंगेर शत-प्रतिशत हुआ वितरणड्ढr सुजीत कुमार मिशड्र्ढr मुंगेर । बालिकाओं में शिक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा मुंगेर जिले में प्रारंभ की गई मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना कारगर साबित हुआ है।मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना के अनुसार जिले में 12,136 छात्राओं को साइकिल देना था। स्कूलों से 11, छात्राओं का नाम आया, जिसे क्रमवार दिया गया।ड्ढr खड़गपुर प्रखंड में वर्ग सात के 664 छात्राओं को साइकिल दिया गया। असरगंज प्रखंड के वर्ग आठ की 222 छात्राओं के बीच साइकिल वितरण करना था, लेकिन स्कूलों से मात्र 177 छात्राओं का नाम जिला मुख्यालय को प्राप्त हुआ। इन सभी छात्राओं को साइकिल उपलब्ध करा दिया गया।ड्ढr हवेली खड़गपुर प्रखंड के पंच कुमारी बालिका विद्यालय की कुछ छात्राओं को साइकिल नहीं मिला था। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया तथा साइकिल वितरण कराया। प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सोहेल अंसारी ने बताया कि पंच कुमारी बालिका विद्यालय के साथ ही सभी बालिकाओं को साइकिल दिया जा चुका है। संग्रामपुर के प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी ने तो जिला प्रशासन को वितरण के बाद 100 साइकिल बचने की रिपोर्ट दी। बालिका साइकिल योजना धरातल पर नहींड्ढr अरुण कुमारड्ढr पूर्णिया। मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना धन के अभाव में पूरी तरह से धरातल पर अब तक नहीं उतर पायी है। नतीजतन, बालिकाओं में उत्साह की बजाय निराशा का भाव पनपने लगा है। पिछले वित्तीय वर्ष में पूर्णिया जिले में पचास फीसदी ही साइकिल का वितरण किया जा सका है। शेष पचास प्रतिशत बालिकाएं आज भी साइकिल के लिए टकटकी लगाए बैठी हैं।ड्ढr सरकारी नियमानुसार साइकिल के लिए प्रति छात्रा दो हजार रुपए उसके खाते में जमा करना है। लेकिन, यहां बहुत से स्कूलों में खाता में पैसा जमा करने की बजाय साइकिल ही मुहैया करायी गयी है जिससे साइकिल की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2007-08 में इस योजना के तहत कुल 1530 बालिकाओं को साइकिल का वितरण किया गया है। इनमें दो राजकीय विद्यालयों की 1छात्राएं, दो अल्पसंख्यक उच्च विद्यालय में 85 छात्राएं, 7 प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालयों में 263 तथा 38 राजकीयकृत विद्यालयों में छात्राओं को साइकिल मिली। साइकिल वितरण के ये आंकड़े मात्र पचास फीसदी हैं जबकि जिले में बालिकाओं की संख्या इन स्कूलों में लगभग दोगुनी है। साइकिल से वंचित छात्राओं ने समझा अफसरशाही का अर्थड्ढr अजिताभड्ढr खगड़िया।जिले में साइकिल से वंचित नवीं कक्षा की छात्राओं को अफसरशाही का अर्थ बखूबी समझ में आ गया जबकि आठवीं कक्षा में पढ़ रही छात्राओं को साइकिल मिल गयी। आर्य कन्या उच्च विद्यालय की पूजा, नेहा, मधु जसी कई छात्राएं साइकिल मिलने से जहां फूली न समा रही थीं वहीं जनता उच्च विद्यालय मानसी की सोनम, स्वाति, चंदा जसी 118 छात्राएं साइकिल न मिलने से मायूस थी। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने 18 मार्च 2007 को जिले में 307 करोड़ की योजनाओं का एकीकृत शुभारम्भ किया था जिसमें एक करोड़ 44 लाख की लागत से जिले के 38 उच्च विद्यालय में नवीं कक्षा में पढ़ने वाली 4 हाार छात्राओं को साइकिल मिलनी थी। योजनाओं को शुरू हुए दो वर्ष बीतने को है लेकिन नवमी कक्षा की छात्राओं को अबतक साइकिल नहीं मिल पायी । इस बीच 8वीं कक्षा की छात्राओं का मामला भी शिक्षा और योजना विभाग के बीच महीनों फंसा रहा हालांकि सात प्रखंडों में 0 फसदी से अधिक आठवीं कक्षा की छात्राएं साइकिल प्राप्त कर लेने में सफल रहीं , जबकि वीं कक्षा की सूची पर ही विचार हो रहा है। जनता उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक डीसी सिंह बताते हैं कि 2007-08 के लिए 118 छात्राओं की सूची 6 माह पहले भेजी गई जिसकी राशि 11 मई को प्राप्त हुई है। इस बीच छात्राएं दसवी कक्षा में आ चुकी हैं। साथ ही साइकिल की कीमत 300 रूपये बढ़ गयी है। यही हाल कमोबेश 37 अन्य विद्यालयों का है। डीईओ राजदेव राम बताते हैं कि छात्राओं का बैंक खाता खुलवाया गया है तथा अच्छी कम्पनी से सरकारी दर पर साइकिल खरीद की बात हो रही है।

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