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मानवाधिकार पर दिखाएं इरादा:एमनेस्टी

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने विश्व नेताओं से आग्रह किया है कि वे मानवाधिकार के मसले पर नये संकल्प के साथ काम करने का इरादा जताएं। विश्व भर में मानवाधिकार हनन की 2008 में रही तस्वीर का जो लेखाजोखा एमनेस्टी इंटरनेशनल रिपोर्ट में पेश किया गया है, वह दिल दहलाने वाला है। रिपोर्ट यहां जामिया मिलिया इस्लामिया के वाइस चांसलर प्रो. मुशीरुल हसन, एक्टर लेखिका और एक्िटविस्ट सादिया देहलवी, हिन्दुस्तान के ब्यूरो प्रमुख विनोद वाष्र्णेय और एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के डाइरक्टर मुकु ल शर्मा ने संयुक्त रूप से जारी की। रिपोर्ट में आतंकवाद को मानवाधिकार हनन की श्रेणी में रखा गया है। लेकिन प्रो. हसन ने सुझाव दिया है कि आतंकवाद शब्द का सावधानी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हर हिंसा को आतंकवाद नहीं कह सकते। इसे व्याख्यायित करने की जरूरत है। उन्होंने जयपुर के विस्फोटों को आतंकवाद मानने से इंकार किया। मानवाधिकार के अंतर्गत गरीबों-अमीरों सभी को समान कानून की सुरक्षा, गरीबी निवारण आजीविका के अधिकार तथा स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच आदि बातें भीड्ढr आती हैं।ड्ढr हिन्दुस्तान के ब्यूरो चीफ विनोद वाष्र्णेय ने विमोचन के बाद पैनल चर्चा में कहा कि भारत मानवाधिकार हनन की बहुत घटनाएं होती हैं, फि र भी भारत का मामला मानवाधिकार के मामले में दुनिया को नेतृत्व देने का बनता है।ड्ढr तिब्बत में हो रहे मानवाधिकार हनन की बात उठाने वाले प्रवासी तिब्बतियों को भी भारत में विरोध दर्ज करने पर कोई रोक नहीं लगाई। उन्होंने माना कि बेशक म्यानमांर में भारत का रवैया इतना अच्छा नहीं रहा। मानवाधिकार हनन के मामले में मीडिया की भूमिका को उन्होंने आड़े हाथ लिया और आग्रह किया कि मीडिया के बदलते दौर में पत्रकारों को मानवाधिकार हनन के मसलों को नये तरीके से उठाने की जुगत करनी चाहिए। सादिया देहलवी ने विस्तार से भारत में मानवाधिकार हनन की घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मणिपुर, नागालैंड, कश्मीर और गुजरात में मानवाधिकार की हालत में बदतर हुई है।

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