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दो टूक

मंडियों में सन्नाटा है। गुस्से में हैं व्यवसायी। आवश्यक वस्तु अधिनियम (7 इसी एक्ट) को वे काला कानून मानते हैं। हाल के दिनों में इस कानून के बेजा इस्तेमाल ने तमाम रिकार्ड तोड़ डाले। सीएम ने इस कानून की समीक्षा को मंत्रियों की एक कमेटी बना दी। रिपोर्ट आने तक छापे रोकने का निर्देश दिया। सवाल लाजिमी है कि क्या मांगें मनवाने का इकलौता हथियार अब बंद ही रह गया है। दिहाड़ी मजदूरों के घरों में चूल्हे नहीं जले। दुकानों पर ताले लटका व्यापारियों ने खुद का भी नुकसान सहा। सरकार को 15 करोड़ की चपत लगी। वर्ष 1में जमाखोरी-कालाबाजारी रोकने के लिए बने इस कानून में कई खामियां हैं। लाइसेंस-कोटा राज से मुक्ित मिलनी ही चाहिए, पर आम जनता के हितों से समझौता किये बगैर।

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