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एपीएल की अनाज योजना पर ग्रहण

जरूरत 1.0 लाख टन गेहूं और चावल की लेकिन मिलता है मात्र 1224 टन! केन्द्र के रवैये से राज्य में गरीबी रखा से ऊपर के परिवारों (एपीएल) की अनाज योजना पर ग्रहण लग गया है। बिहार को एपीएल कोटे में आवंटित होने वाले गेहूं और चावल में लगातार कटौती होती जा रही है। केन्द्र का तर्क है कि राज्य में एपीएल द्वारा अनाज का उठाव नहीं होता। राज्य सरकार भी मानती है कि कुछ साल पहले स्थिति अलग थी लेकिन अब तो हालात बदल रहे हैं। पिछले कुछ समय में ही बीपीएल और अन्त्योदय योजना के अनाज का उठाव बढ़ गया है। इसी तर्क के साथ राज्य सरकार ने हाल ही में केन्द्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय को पत्र लिखकर एपीएल आबादी के लिए भी अनाज की मांग की है।ड्ढr ड्ढr ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वर्ष 2007 में तैयार नयी पारिवारिक सव्रेक्षण सूची के तहत राज्य में एपीएल परिवारों की संख्या 85,33,7है। राज्य के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सूत्रों के अनुसार इन परिवारों के लिए प्रति माह 0 टन गेहूं और उतना ही चावल चाहिए। दूसरी ओर केन्द्र से हरक माह मात्र 10 टन गेहूं और 1043 टन चावल भेजा जा रहा है। नतीजतन सभी एपीएल परिवारों को अनाज उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पा रहा।

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