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पटना में सरचामीं पर नहीं उतरी साइकिल योजना

सूबे के सरकारी स्कूलों में छात्राओं में शिक्षा से ड्रॉप आउट रोकने के उद्देश्य से लागू होने वाली महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री साइकिल वितरण योजना अभी सरजमीं से कोसों दूर है। सरकारी अधिकारियों की लालफीताशही एवं बैंकों के अड़ियल रुख के कारण छात्राओं की आशाएं अब क्षीण होने लगी हैं। पटना जिले में अब तक मात्र 30 फीसदी ही लक्ष्य की प्राप्ति हो सकी है।ड्ढr ड्ढr यहां के अधिकांश विद्यालयों में अब तक साइकिल का वितरण नहीं हुआ है। डाकबंगला चौराहा स्थित राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में कुल छात्राओं का खाता तो खुला लेकिन राशि उनके खाते तक पहुंची ही नहीं। विद्यालय की प्रिंसिपल इन्दु श्रीवास्तव बताती हैं कि पहले तो स्टेट बैंक खाता खोलने को तैयार हो गये लेकिन छात्राएं जब वहां पहुंची तो खाता खोलने के लिए राशि की मांग होने लगी। सरकारी नियम के तहत छात्राओं का खाता शून्य बैलेन्स पर खुलना था। काफी दौड़-धूप एवं आरजू-मिन्नत के बाद आंध्रा बैंक में खाता खुलवाया गया। इस वर्ष मार्च महीने में जिला शिक्षा पदाधिकारी के द्वारा एक लाख छियासी हजार का चेक मिला है लेकिन स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं मिला है।ड्ढr नतीजतन छात्राओं के खातों में पैसा शिफ्ट नहीं हुआ है। यही नहीं पटना के अनेक दूरदराज वाले प्रखंडों जैसे मसौढ़ी, अथमलगोला, बाढ़ आदि जगहों पर छात्राओं का खाता भी नहीं खुला है। पटना जिले की डी.ई.ओ. किरण कुमारी बताती हैं कि उन्हें बीते वर्ष 07-08 में 3 करोड़ की राशि मिली है जिसे विद्यालयों में भेजा जा रहा है। गया में साइकिल ने बढ़ाया छात्राओं का उत्साहड्ढr गया (हि.सं.)। नवम् वर्ग की छात्राओं को मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना के तहत तथा उसे स्वावलंबी बनाने के लिए साइकिल योजना चला रही है। छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल उपलब्ध करा रही है, वहीं दूसरी ओर अभी भी काफी छात्राएं साइकिल योजना का लाभ पाने से वंचित रह गई हैं। वैसी छात्राएं अपने को उपेक्षित महसूस कर रही हैं। जिले में कुल 105 विद्यालयों में वर्ष 2007-08 के तहत नवीं कक्षा में अध्ययनरत छात्राओं के लिए मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना का संचालन किया जा रहा है। छात्राओं की कुल संख्या करीब साढ़े बारह हजार है। इसमें से साठ प्रतिशत छात्राओं को साइकिल की सुविधा दी जा रही है। इसमें भी अभी तक शत-प्रतिशत छात्राओं को साइकिल उपलब्ध नहीं कराई गई है। हालांकि साइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए लगभग सवा करोड़ रुपए विद्यालयों को उपलब्ध कराए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित विद्यालयों की छात्राएं साइकिल पाकर काफी उत्साहित दिख रही हैं। अपने-अपने घर से साइकिल चढ़कर नियमित विद्यालय आ रही हैं। प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय, फतेहपुर की छात्रा कुमारी श्रुति ने प्रसन्न भाव में कहा कि शुरु में प्रारंभिक समय में साइकिल चलाने में काफी झिझक हो रही थी, लेकिन अब काफी अच्छा लग रहा है। नेहा कुमारी ने कहा कि घर से स्कूल की दूरी ज्यादा रहने के कारण प्रतिदिन स्कूल नहीं जा पाती थी। अब स्कूल जाना आसान हो गया है। 25 स्कूलों की लड़कियों को ही साइकिलें नसीबड्ढr मदन भागलपुरड्ढr नवमी कक्षा की छात्राओं को साइकिल देने के लिए जिले के 0 हाईस्कूलों को राशि दे दी गई है लेकिन ढाई माह बीत जाने के बाद भी केवल 20-25 स्कूलों की लड़कियों को ही साइकिलें नसीब हो सकी हैं। जिन स्कूलों में साइकिलें बांटी गई हैं वहां की छात्राएं खुश तो हैं लेकिन उनकी शिकायत है कि साइकिलों में कई तरह की गड़बड़ियां है। इसकी पुष्टि तकनीकी विशेषज्ञ भी कर रहे हैं।ड्ढr विशेषज्ञ अरविंद का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण साइकिलें नहीं दी गई हैं। उनकी मानें तो जो साइकिलें दी जा रही हैं जिनकी कीमत 1700-1850 रुपए होगी। इस बाबत डीईओ मधुसूदन पासवान का कहना है कि स्टैंडर्ड साइकिल दो हाार रुपए में नहीं हो सकती है। इसलिए साइकिलों में कुछ सामान कम लगाए गए हैं। लेकिन गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है। शेष स्कूलों में अबतक साइकिल नहीं बांटने की वजह डीईओ ने बताया कि बैंक छात्राओं का खाता खोलने से इंकार कर रहा है। बैंक में खाता खुलते ही साइकिलें मिल जाएंगी। नवगछिया के एक स्कूल में बांटी गई साइकिलों में स्टैंड नहीं होने की शिकायत लड़कियों की ने की है। मोक्षदा गर्ल्स हाईस्कूल की प्राचार्य प्रतिभा सिन्हा ने बताया कि साइकिल का इस्तेमाल लड़कियां कम उनके परिवारवाले ज्यादा कर रहे हैं।ड्ढr लड़कियां साइकिल से तो आती हैं लेकिन खुद चलाकर नहीं बल्कि उसके बाबूजी या भाई बैठाकर लाते हैं। डीईओ ने बताया कि भागलपुर की 8 हाार लड़कियों को साइकिलें दी जाएंगी जिनमें सबसे ज्यादा शहरी क्षेत्र की 2366 लड़कियों को दी जाएंगी। लेकिन अभी तक सबसे कम साइकिलें शहरी क्षेत्र के ही स्कूलों में बांटी गई हैं।

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