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विदेशी कंपनियों के निशाने पर छोटी कंपनियां

भारत की टेलीकॉम कंपनियां जहां विदेशों में कंपनियों के अधिग्रहण की कोशिशों में लगी हैं, वहीं विदेशी टेलीकॉम कंपनियां भारतीय कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए जीतोड़ प्रयास कर रही हैं। इनमें जर्मनी की डय़ूश टेलीकॉम, खाड़ी की प्रमुख कंपनी इतिसलात, सिंगापुर की सिंगटेल, अमेरिका की ए टी एंड टी शामिल हैं। संचार मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि ये कंपनियां उन भारतीय कंपनियों में हिस्सेदारी लेने के लिए बातचीत शुरू कर चुकी हैं, जिन्हें अपनी मोबाइल सेवाएं शुरू करने के लिए हाल ही में लाइसेंस मिला है। इन्हें ऐसी किसी भी कंपनी में 4प्रतिशत हिस्सेदारी लेने में कोई कानूनी बाधा नहीं। अगर ये 51 से 74 प्रतिशत हिस्सेदारी चाहेंगी तो पहले इन्हें विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की अनुमति लेनी होगी जानकार कह रहे हैं कि विदेशी कंपनियां भारत के तेजी से फैलते टेलीकॉम सेक्टर का स्वाद चखने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहतीं। उद्योग और वाणिय संगठन एसोचैम के अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत ने पिछले हफ्ते ही कहा कि वे चाह रहे हैं कि उनकी टेलीकॉम कंपनी डाटाकॉम में कोई विदेशी कंपनी हिस्सेदारी ले ले। उससे हमें दो तरह के लाभ होंगे। पहला, एक तो बाजार में स्थापित होने के लिए जरूरी भारी-भरकम पूंजी की व्यवस्था हो जाएगी। दूसरे, हमें विदेशी कंपनी के अनुभव का लाभ भी मिल जाएगा। इसी तरह श्याम टेलीलिंक और यूनिटेक भी चाह रही हैं कि कोई विदेशी कंपनी उनमें हिस्सेदारी ले ले। छोटी और नई कंपनियों की इस इच्छा की बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि भारत के बाजार में भारती एयरटेल, वोडाफोन, रिलायंस कम्युनिकेशंस, आइडिया जसी बड़ी कंपनियों की जिस तरह मजबूत पकड़ है, उसे देखते हुए किसी भी बिल्कुल नई कंपनी के लिए पैर जमाना आसान नहीं होगा।

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  • Web Title: विदेशी कंपनियों के निशाने पर छोटी कंपनियां